पिता नन्हे से परिंदे का बड़ा आसमान है, सागर मेश्राम ने 1.70 करोड़ रुपए जमा कर कराई प्रियांशु की सफल सर्जरी

पिता नन्हे से परिंदे का बड़ा आसमान है, सागर मेश्राम ने 1.70 करोड़ रुपए जमा कर कराई प्रियांशु की सफल सर्जरी

पिता नन्हे से परिंदे का बड़ा आसमान है, पिता ने 1.70 करोड़ रुपए जमा कर कराई बच्चे की सफल सर्जरी

 

 द लोकनीति:डेस्क गरिमा श्रीवास्तव 

 

किसी ने बिल्कुल सही कहा है,

पिता रोटी है कपड़ा है मकान है

 पिता नन्हे से परिंदे का बड़ा आसमान है,

पिता सुरक्षा है साथ है,

पिता नहीं तो बचपन अनाथ है..

 ऐसी ही एक बेहद मार्मिक घटना हम आपको बताने जा रहे हैं. जिसमें पिता ने अपने बच्चे को नया जीवन देने के लिए क्या कुछ नहीं किया

 ये है 6 साल के प्रियांशु मेश्राम....

जब यह महज 4 महीने के थे तब डॉक्टरों द्वारा इस बात की जानकारी मिली कि इन्हें डबल आउटलेट राइट वेंट्रीकल विद लार्ज मस्कुलर वेंट्रिकुलर सेप्टल डिफेक्ट नाम की बीमारी है.

इस बीमारी की वजह से उनके दिल में बड़ा छेद हो गया. बीमारी की वजह से खून दिल की जगह सीधे फेफड़ों में बहुत ही ज्यादा प्रेशर से जाता है. भारत में इसका इलाज मुमकिन नहीं था...

 पर एक पिता अपने बच्चे को बचाने के लिए क्या कुछ नहीं करते हैं यह देखिए.

 भोपाल में रहने वाले इनके पिता सागर मेश्राम ने हर हाल में बेटे की जिंदगी बचाने की ठान ली.

उन्होंने प्रियांशु की बीमारी के बारे में सोशल मीडिया पर वीडियो पोस्ट किया. जिसके बाद सोशल मीडिया से ही उन्हें जानकारी मिली कि इसका इलाज अमेरिका के बोस्टन चिल्ड्रन हॉस्पिटल में है जिसके लिए करोड़ों रुपए खर्च होंगे.

 बताते चलें कि प्रियांशु के पिता सागर पुणे में पिज़्ज़ा डिलीवरी का काम करते हैं और सिर्फ ₹15000 महीना काम आते हैं. बेटे को बचाने के लिए उन्होंने हर जगह मदद मांगी अपना घर तक बेच दिया... फिर सोशल मीडिया के जरिए फंड जुटाया. और आखिरकार पैसा इकट्ठा हो गया वे 24 मार्च को न्यूयार्क पहुंचे यहां से वह हॉस्पिटल गए..बीते सोमवार को करीब 13 घंटे चले ऑपरेशन के बाद प्रियांशु की जिंदगी बच गई है वह फिलहाल आईसीयू में है.

 प्रियांशु के माता पिता ने बताया कि आज के दिन का हमें बेसब्री से इंतजार था. हॉस्पिटल के चाइल्ड स्पेशलिस्ट कार्डियक सर्जन डॉक्टर सीताराम इमानी और उनकी 10 सदस्य टीम ने मेरे बेटे को नई जिंदगी दी है मुझे याद है कि जब प्रियांशु पहली बार बीमार हुआ तब हम उसे दिल्ली इन चले गए थे दिल्ली एम्स में इस बात की जानकारी मिली कि इस बीमारी का सर्जरी से इलाज है.

लेकिन यह सर्जरी बच्चे के जन्म से एक या 2 हफ्ते के भीतर होनी चाहिए लेकिन प्रियांशु 4 महीने का हो चुका था इसीलिए अब सर्जरी नहीं हो सकती थी..

 हम फोर्टिस एस्कॉर्ट अस्पताल गए. इस अस्पताल में बताया गया कि 3 ऑपरेशन होंगे फिर भी प्रियांशु 10 साल से ज्यादा नहीं जीत पाएगा मैंने एक सर्जरी 13 जनवरी 2015 को बराई दूसरी सर्जरी 1 साल बाद होने की तब पूरा परिवार मुंबई शिफ्ट हो गया.

सर्जरी के लिए भोपाल के घर को बेचकर पैसे जुटाए. जब जनवरी 2016 में एम्स पहुंचे तो डॉक्टरों ने बताया कि अब सर्जरी संभव नहीं है. आपके बेटे की सिर्फ कुछ सांसे ही बची हैं. पर परिवार वालों ने हिम्मत नहीं हारी और सोशल मीडिया पर बीमारी के बारे में पोस्ट किया है जिसके बाद बोस्टन की जानकारी मिली.

बस फिर क्या था माता-पिता पैसे जुटाने में लग गए हर जगह से मदद मांगी तो 3 साल 8 महीने में प्रियांशु के पिता ने 1 करोड़ 70लाख रुपए जुटा लिए. डॉक्टर इमानी को एक के बाद एक 200 ईमेल किए गए और आखिरकार वह ऑपरेशन के लिए राजी हो गए और 4 साल बाद ऑपरेशन का वक्त आ गया जब प्रियांशु को ओटी में ले जा रहे थे तब उसने मां से कहा था "लौट कर आऊंगा तुम जाना मत.."

और आखिरकार प्रियांशु का ऑपरेशन सफल हुआ. वह इस वक्त आईसीयू में है. माता पिता का लंबा इंतजार खत्म हुआ अब वह प्रियांशु के सकुशल आईसीयू से वापस आने का इंतजार कर रहे हैं.

आखिरकार एक पिता की कड़ी मेहनत और बेटे के प्रति प्यार ने यह ऑपरेशन सफल कराया.

 पूरा देश प्रियांशु के सकुशल भारत लौटने की प्रार्थना कर रहा है..

इसीलिए कहा गया है कि माता पिता से बड़ा कोई भगवान नहीं है..