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500 से अधिक अतिथि विद्वानों को अब तक नहीं मिल सका रोजगार! जाने कब सुनेगी शिवराज सरकार

500 से अधिक अतिथि विद्वानों को अब तक नहीं मिल सका रोजगार! जाने कब सुनेगी शिवराज सरकार

भोपाल/गरिमा श्रीवास्तव:-
 पिछले डेढ़ साल से प्रदेश के सरकारी महाविद्यालयों के लगभग 500 से अधिक बचे हुए फाॅलेन आउट अतिथि विद्वानों को शिवराज सरकार भी अब तक रोजगार नहीं दे सकी है।  एमपीपीएससी से हुई विवादित ग्रंथपाल, क्रीड़ा अधिकारी और सहायक प्राध्यापक भर्ती 2017 की नियुक्ति के बाद से ही अतिथि विद्वान दुखी जीवन जी रहे हैं। इनका कमलनाथ सरकार में साध देने वाली वर्तमान शिवराज सरकार ने भी इनके सुरक्षित भविष्य के लिए कैबिनेट से अब तक निर्णय नहीं लिया है।
 नियमित भर्ती में इनके लिए विशेष उचित लाभ का प्रावधान नहीं होने के कारण अब यह अन्य क्षेत्रों में रोजगार पाने के लायक भी नहीं रहे हैं। कालखण्ड दर पर सेवा देने से मिलने वाले अल्प मानदेय से परिवार का ठीक से पालन पोषण तक नहीं हो पाता था। जिसके कारण कई अतिथि  विद्वानों की जीवन लीला तक समाप्त हो चुकी है।
  पूर्व दिग्विजय सिंह सरकार से यह पढ़ाते आ रहे हैं। शिवराज सरकार ने विधानसभा सत्र में भी इनके लिए ध्यान आकृष्ट नहीं किया है। विपक्ष द्वारा लगाए गए प्रश्नों के जवाब भी उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. मोहन यादव ने नकारात्मक रूप में ही दिए हैं। लेकिन अतिथि विद्वान नियमितीकरण संघर्ष मोर्चा के प्रतिनिधि जब भी सीएम और उच्च शिक्षा मंत्री से मिलते हैं तो इनको सकारात्मक आश्वासन दिया जाता है। परंतु हकीकत में अब तक हुआ कुछ नहीं है। इनको वचन देकर सत्ता पाने वाली पूर्व कमलनाथ सरकार ने ही इनके पदों पर नियुक्ति दी थी। अब विपक्ष में रहकर भाजपा सरकार की तरह इनके लिए ढ़कोसला कर रही है। 
 अतिथि विद्वान नियमितीकरण संघर्ष मोर्चा के मीडिया प्रभारी शंकर लाल खरवाडिया का इस बारे में कहना है कि, अब तो हमारे दर्द को देखकर अन्य राज्यों की तर्ज पर फिक्स मानदेय की ही नीति बना देना चाहिए। उसके बाद नियमितीकरण के लिए कदम उठाना न्याय संगत होगा।

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