2 नवंबर 2026खबरें • विश्लेषण • जनसरोकार

मध्यप्रदेश की आवाज़
जनसरोकार की पत्रकारिता

खेल में भी सियासत का खेला, मोदी ने राजीव खेल रत्न अवार्ड का नाम बदल रख दिया यह नाम

नरेंद्र मोदी को करनी है सिर्फ राजनीति, इसीलिए बदला राजीव गांधी खेल रत्न पुरस्कार का नाम, आक्रोश में कांग्रेस 

नई दिल्ली : शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्वीट कर राजीव गांधी खेल रत्न पुरस्कार का नाम मेजर ध्यानचंद खेल रत्न पुरस्कार करने का ऐलान किया, प्रधानमंत्री मोदी ने ट्वीट करते हुए लिखा कि देश को गर्वित कर देने वाले पलों के बीच अनेक देशवासियों का ये आग्रह भी सामने आया है कि खेल रत्न पुरस्कार का नाम मेजर ध्यानचंद जी को समर्पित किया जाए। लोगों की भावनाओं को देखते हुए, इसका नाम अब मेजर ध्यानचंद खेल रत्न पुरस्कार किया जा रहा है। 

बदले हुए नाम को लेकर देश में राजनीति शुरू हो गई है। कांग्रेस ने इसे देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की घटिया राजनीति करार दिया है। कांग्रेस नेता रणदीप सुरजेवाला ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि हम मेजर ध्यानचंद के नाम पर खेल पुरस्कार रखने का स्वागत है। राजीव गांधी अपने नाम से नहीं बल्कि अपने काम से जाने जाते हैं। साथ ही उन्होंने कहा कि सरकार नरेंद्र मोदी स्टेडियम और अरुण जेटली स्टेडियम का भी नाम बदलकर मैरीकॉम, सचिन तेंदुलकर समेत कई मशहूर खिलाड़ियों के नाम पर रखे।

वहीं, कांग्रेस के कोषाध्यक्ष और पूर्व रेल मंत्री पवन बंसल ने कहा कि मेजर ध्यानचंद जैसे महान खिलाड़ी को राजनीति में नहीं घसीटना चाहिए। वह कहते हैं अगर नरेंद्र मोदी को मेजर ध्यानचंद के नाम पर कुछ करना ही था तो एक नए खेल पुरस्कार की घोषणा भी की जा सकती थी। उन्होंने कहा क्योंकि नरेंद्र मोदी को सिर्फ राजनीति करनी है इसीलिए उन्होंने इस पुरस्कार का नाम बदल दिया। 

इसके अलावा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम बदलने के बाद लोगों की अलग-अलग तरह की प्रतिक्रियाएं भी सामने आने लगीं। सोशल मीडिया पर बहुत से लोगों ने प्रधानमंत्री मोदी के नाम पर रखे गए गुजरात के स्टेडियम से उनका नाम हटाए जाने का अनुरोध किया। जबकि कुछ लोगों ने इस बात का तर्क दिया कि गांधी परिवार के नाम पर जितने भी पुरस्कार और जितनी योजनाएं चलती हैं उनका भी नाम बदल दिया जाना चाहिए।

कुल मिलाकर एक बार फिर से देश में बदले हुए नाम की राजनीति गरमा गई है।

भारत रत्न की स्थापना

  • भारत रत्न की शुरुआत 2 जनवरी, 1954 को तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने की थी।
  • 1954 में सर्वप्रथम भारत रत्न सी. राजगोपालाचारी, सर्वपल्ली राधाकृष्णन और सी. वी. रमन को दिया गया था। उस समय केवल जीवित व्यक्ति को यह सम्मान दिया जाता था।
  • 1955 में मरणोपरांत भी सम्मान देने का प्रावधान भी जोड़ दिया गया।
  • 2013 में पहली बार खेल के क्षेत्र में नाम कमाने वालों को भी भारत रत्न देने का निर्णय लिया गया और इसी कड़ी में क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर को इस सम्मान के लिए चुना गया।
  • 2013 में सचिन तेंदुलकर के साथ वैज्ञानिक सी.एन.आर. राव को भी भारत रत्न दिया गया।

किसे दिया जाता है

  • यह सम्मान उन व्यक्तियों को दिया जाता है जिन्होंने देश के किसी भी क्षेत्र में महत्वपूर्ण कार्य किए हों।
  • अपने-अपने क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य करते हुए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का गौरव बढ़ाया हो।
  • यह सम्मान कला, साहित्य, विज्ञान के क्षेत्र में तथा किसी राजनीतिज्ञ, विचारक, वैज्ञानिक, उद्योगपति, लेखक और समाजसेवी को असाधारण सेवा हेतु व उच्च लोक सेवा को मान्यता देने के लिए भारत सरकार की ओर से दिया जाता है।
लेखक के बारे में

अपनी प्रतिक्रिया दें

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा। ज़रूरी खानों पर * चिह्न है।