MP ग़रीबों के राशन से घोटाले करने में अव्वल , इधर 435 राशन दुकान में 1.5 करोड़ का घोटाला

MP ग़रीबों के राशन से घोटाले करने में अव्वल , इधर 435 राशन दुकान में 1.5 करोड़ का घोटाला
- कटनी ज़िले में 10 सालों में नहीं हो पाई जांच पूरी
- कार्डधारियों की संख्या से अधिक राशन का कर दिया गया था आवंटन
- अफसरों और सत्ता के दलालों की मिलीभगत से चल रहा था पूरा खेल
द लोकनीति डेस्क भोपाल
जहां एक तरफ मध्य प्रदेश में शिवराज सरकार गरीबों को मुर्गा और मुर्गी का अनाज खिलाने के मामले में बुरी तरह घिरती नजर आ रही है तो वही ताजा जानकारी में केंद्र सरकार ने शिवराज सरकार से इस मामले को लेकर पूरी रिपोर्ट मांगी है की क्या यह मामला सिर्फ 2 जिलो यानि मंडला और बालाघाट जिलों का है या पूरे मध्यप्रदेश में यह घटिया चावल का खेल चल रहा है???
सरकार ने किया अपना बचाव गिराई अधिकारियों पर ग़ाज :
मामले में शिवराज सरकार ने अपना बचाव करते हुए बालाघाट जिले के जिला प्रबंधक को सस्पेंड कर दिया है वहीं मंडला जिले के संविदा पर नियुक्त फूड इंस्पेक्टर को भी हटा दिया गया है। अब शिवराज सरकार मध्यप्रदेश में जहां-जहां चावल के गोदाम हैं उनकी जांच भी करा रही है , ताकि इस बात का खुलासा हो सके कि गरीबों को कोरोना काल के दौरान बांटे गए पीडीएस के चावल खाने योग्य थे या नहीं हालांकि केंद्र के CAGL लैब ने इसे जानवरों के खाने के योग्य भी नहीं बताया।
कटनी ज़िले में भी हुआ बड़ा राशन घोटाला !!!!
यहां राशन घोटाले की फाइल फिर से चर्चाओं में आ चुकी है । जिसकी कार्यवाही के दस्तावेज आलमारी के बंद दरवाजों में वर्षों से सरकार की योजनाओं की तरह धूल कह रहे हैं। दरअसल यह गड़बड़ी कटनी जिले के तकरीबन 435 राशन दुकानों की है आपको बता दें यहां पर कार्डधारियों की संख्या से अधिक राशन का आवंटन कर दिया गया और उन्हें हवा में बांट भी दिया गया ।
यहां लीड प्रबंधक समिति प्रबंधक और विक्रेता हवा में उसका वितरण करते हुए नजर आए। जिसकी निगरानी तो खाद्य आपूर्ति विभाग और सहकारिता विभाग के अफसरों को करनी थी लेकिन सरकारी अफसरों ने सब कुछ सरकार की तरह सब गोलमाल कर दिया। इसके बावजूद वे आंखों में पट्टी बांधे रहे वही जब सरकार के नुमाइंदों की शिकायत हुई तो उनके कान खड़े हुए। आनन-फानन में पहले ढीमरखेड़ा और बहोरीबंद ब्लॉक की दुकानों से यह गड़बड़ी निकली। अब यह जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ी तो अधिकांश दुकानें इस दायरे में आना शुरू हो गईं। शुरुआती दौर में लगभग 1करोड़ 35 लाख रुपये की गड़बड़ी पाई गई, जहां तत्काल एडीएम ने इन अनियमितताओं को पकड़ लिया। जिसके बाद विक्रेता लामबंद हुए और दोबारा जांच कराने की मांग की तो गोलमाल जांच के बाद घोटाले की राशि अब मोलभाव करते हुए 40 लाख रुपए में आ गई । इतनी मशक्कत और गोलमाल घोटाले के बावजूद अफसर इस मामले में अभी तक किसी भी दोषी को नहीं खोज सके ।
क्या है पूरा मामला..????
दरअसल यह मामला और या यूं कहें कि बहुचर्चित घोटाला करीब 10 वर्ष पुराना है ,जहां वर्ष 2007 से लेकर वर्ष 2012 तक राशन दुकानों को कार्ड धारियों की संख्या से अधिक अनाज का आवंटन कर दिया गया था। जिसकी शिकायत हुई तो जबलपुर के अधिकारियों के नेतृत्व में जांच टीम तो गठित की गई तभी जांच में जुटे अधिकारियों ने पाया कि निर्धारित आवंटन की अपेक्षा दुकानों को अधिक राशन का वितरण किया गया है। अब दुकानों से राशन वितरण के संबंध में दस्तावेज जांच अधिकारियों ने मांगे तो दुकानदार कोई दस्तावेज नहीं दिखा सके । जब इसकी जानकारी सत्ता के दलालों को मिली तो उल्टा ऊपर जांच अधिकारियों पर ही यह दोषारोपण कर दिए कि उनकी बात नहीं सुनी गई। जिसके कारण जांच में 5 वर्ष से ज्यादा का समय लग गया ।
जांच पर जांच लेकिन कार्यवाही के नाम पर शून्य : फुटबॉल की तरह घूमती रही भोपाल में फ़ाइल
जांच के ऊपर जांच करने में अधिकारियों ने अपना कीमती समय नष्ट तो कर दिया । अब जब आज जांच पूरी हुई तो कार्रवाई की फाइल भोपाल और जांच अधिकारियों के बीच ही किसी फुटबॉल की समान घूमती नजर आई। वही इस संबंध में जब दोबारा शिकायत हुई तो जांच प्रतिवेदन में पिछले वर्ष के जनवरी माह में सहकारिता आयुक्त को उल्लेख किया गया था कि तत्कालीन संयुक्त आयुक्त सहकारिता जबलपुर के जांच प्रतिवेदन 19 नवंबर 2019 के अनुसार संबंधित समितियों के समिति प्रबंधक विक्रेताओं को जिम्मेदार मानते हुए उनके विरुद्ध सेवा नियमों के विरुद्ध कार्रवाई करने तथा आपराधिक प्रकरण दर्ज करने की अनुशंसा की गई कि इस संबंध में कार्रवाई की जाए।
इस तरह चलता है घटिया खेल
मध्यप्रदेश में जहां कोरोना काल के दौरान जानवरों से बदतर क्वालिटी का चावल जनता को खिला दिया जाता है। उसी मध्यप्रदेश में यह खेल काफी पुराना रहा है यही वजह है कि मध्य प्रदेश गरीबों के राशन से घोटाला करने में अब्बल दर्जे का प्रदेश बन गया है।
ऐसे चलता है खेल…..
खाद विभाग के जानकारों की मानें तो। ….. यदि किसी दुकान में बीपीएल के 10 और AAY के 20 ग्राहक हैं तो यहां पर राशन आवंटन 50 से 100 ग्राहकों का कर दिया गया। इसके लिए प्रत्येक जनपद से बी पी एल और AAY कार्ड धारियों की संख्या खाद आपूर्ति विभाग द्वारा ली जानी थी। इसके बावजूद समिति प्रबंधक से मिलीभगत कर अफसरों ने विक्रेताओं को कागज औऱ आकाशवाणी करते हुए राशन वितरण कर दिया ।वही अफसरों के प्रत्यक्ष हाथ होने से विक्रेताओं ने भी दिलेरी से राशन हवा में बांटते गए और गरीबों के राशन को गोदामों में पहुंचा कर स्वयं अपनी जेबों में बड़ी-बड़ी नोटों की गड्डियां समेटेते गए। इस मामले में अफसरों का भी खासा ध्यान दिया गया क्योंकि अफसरों के बिना ऐसा घोटाला करना काफी मुश्किल है तो अफसरों ने भी जमकर लूटा मारी मचाई।
वही इस संबंध में पीके श्रीवास्तव जिला खाद्य आपूर्ति अधिकारी ने कहा कि प्रमुख सचिव ने सहकारिता आयुक्त को पत्र लिखा है कि उस समय लीड प्रबंधक और विक्रेता कौन रहे जांच प्रतिवेदन में किसी का नाम उल्लेख नहीं किया गया है। इसलिए सहकारिता विभाग के अधिकारी ही यह बता सकते हैं कि उस समय राशन की गड़बड़ी में कौन-कौन से लोग शामिल रहे और घोटाले बाजों के आरोपियों के नाम उजागर किया जा सकता है।


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