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ग्वालियर चंबल के इतिहास में दो कट्टर सियासी विरोधियों की हुई मुलाकात, दोनों नेताओं ने दिए ये बड़े बयान… हलचल तेज़

मध्यप्रदेश/ग्वालियर : ग्वालियर के दो दिवसीय दौरे पर आए बीजेपी के राज्यसभा सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया ने शुक्रवार की शाम को पूर्व मंत्री जयभान सिंह पवैया के घर जाकर उनसे मुलाकात की।

ग्वालियर चंबल के इतिहास में दो कट्टर सियासी विरोधियों के बीच शुक्रवार शाम को ये अहम मुलाकात हुई। मालूम हो कि ये दोनों नेता एक-दूसरे के धुर विरोधी माने जाते हैं। लेकिन, ग्वालियर चंबल के इतिहास में यह मुलाकात बेहद अहम मानी जा रही हैं।

हालांकि, सिंधिया और पवैया दोनों ने इस मुलाकात को पारिवारिक मुलाकात बताया।

पवैया से मुलाकात के बाद ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा, “मैंने पवैया जी के साथ एक नया संपर्क- नया रिश्ता कायम करने की कोशिश की हैं। अतीत, अतीत होता है, वर्तमान वर्तमान। भविष्य में पवैया जी और हम दोनों मिलकर काम करेंगे। “सिंधिया ने कहा, “आज पवैया जी का साथ और उनका प्रेम मुझे मिला है, उसे मैं अपना सौभाग्य समझता हूं। पवैया जी का लंबा अनुभव और बड़ा कार्यकाल रहा हैं। उनके अनुभव का लाभ आने वाले समय में मुझे मिलेगा। 

सिंधिया ने कहा कि मुझे विश्वास है कि हम दोनों साथ मिलकर ग्वालियर के विकास और तरक्की के लिए काम करेंगे। 

इधर, पूर्वमंत्री जयभान सिंह पवैया ने सिंधिया से मुलाकात पर कहा, सिंधिया जी का आज मेरे आवास पर आना एक कार्यकर्ता का दूसरे कार्यकर्ता के दुख बांटने से ज्यादा किसी और मायने में नहीं देखा जाना चाहिए। शोक संवेदना पॉलिटिकल सेलिब्रेशन से हटके हुआ करती हैं, इसलिए हमारी भेंट आज पारिवारिक और संवेदना की दृष्टि से थी। मुझे अच्छा लगा कि दुख बांटने का जो उनका स्वभाव है, उससे हमें सांत्वना मिली हैं। 

उन्होंने कहा कि “भारतीय समाज की परंपरा है कि हम एकदूसरे का दुख बांटते हैं. मेरे पूज्य पिताजी चले गए, उसके बाद मेरा पूरा परिवार कोरोना के संकट में रहा। ऐसे दुख में दलों की भी सीमाएं नहीं होती। वह (सिंधिया) तो हमारे परिवार के कार्यकर्ता है। आज शोक संवेदनाओं और पारिवारिक विषय पर चर्चा हुई और पोस्ट कोविड पर उनसे बातचीत हुई क्योंकि सिंधिया जी  भी कोविड-19 संकट से गुजरे हैं।

लेकिन सियासी जानकर मानते हैं कि इससे ग्वालियर-चंबल ही नहीं प्रदेश-देश की राजनीति में बड़े मायने निकलेंगे। 

मालूम हो कि पवैया के पिता बलवंत सिंह पवैया का 20 अप्रैल को निधन हुआ था। एक ही पार्टी में होने के नाते सिंधिया शोक जताने के लिए भगत सिंह नगर स्थित पवैया के बंगले गए थे और पूर्व मंत्री जयभान सिंह पवैया से मुलाकात की थी।

 

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