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इंदौर : बेबस लाचार सिस्टम! ऑक्सीजन-बेड की भारी कमी, अस्पताल की चौखट पर दम तोड़ रहे मरीज़

मध्यप्रदेश/इंदौर – मध्यप्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर में इस समय बेहद खराब हालात हैं। यहां अस्पतालों में ऑक्सीजन और बेड की भारी कमी नज़र आ रहीं हैं। सभी अस्पतालों में मर्जी के मुताबिक मरीजों को भर्ती किया जा रहा हैं। सरकारी अस्पताल हो या निजी, गेट से ही यह कहकर लौटा दिया जाता है कि बेड खाली नहीं हैंं। कहीं कोई वेटिंग लिस्ट या रजिस्टर नहीं हैं। और न ही फोन कर बुलाया जाता है।

वहीं, दूसरी तरफ ऑक्सीजन की कमी के चलते कई अस्पतालोें ने मरीजोें को भर्ती करने से मना कर दिया हैं। आइसोलेशन बेड खाली हैं, लेकिन वह ऑक्सीजन की कमी के चलते इसे अन्य बेड में तब्दील नहीं कर रहे हैं। 

देखा जाए गए तो अभी ऑक्सीजन की जरूरत 110 टन हर रोज हैं। लेकिन 80 टन ही मिल रही। यदि बेड बढ़े तो जरूरत 125 टन होगी। 

इतना ही नहीं ऑक्सीजन की बढ़ती मांग के अनुसार आपूर्ति नहीं होने सेे अस्पतालों में मरीजों के डिस्चार्ज का समय दोगुना हो गया हैं। पहले मरीज औसत 5 से 6 दिन में डिस्चार्ज हो रहे थे, लेकिन अब ऑक्सीजन कम फ्लो से मिलने के कारण लंग्स तेजी से रिकवर नहीं हो पा रहे हैं। डॉक्टर्स के अनुसार मौजूदा स्थिति में गंभीर मरीज को 10 से 14 दिन तक भर्ती होना पड़ रहा हैं। 

बता दे कि प्रशासन की सूची में कोरोना मरीजों के लिए 107 अस्पताल आरक्षित हैं, इनमें सब मिलाकर 7000 बेड उपलब्ध हैं, लेकिन हकीकत में मरीज एक-एक बेड को तरस रहे हैं। 

बताया जा रहा है कि अस्पतालों में आईसीयू, एचडीयू और ऑक्सीजन मिलाकर 5500 बेड हैं और सभी फुल हैं। यदि तीन हजार बेड बढ़ाए जाते हैं तो हर दिन सवा सौ से डेढ़ सौ टन ऑक्सीजन की जरूरत होगी, जो फिलहाल नहीं हैं। 

जबकि कई मरीज़ ऐसे भी है जो ऑक्सीजन और बेड की कमी के कारण अस्पताल की चौखट पर आकर अपना दम तोड़ रहे हैं। 

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