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हाईकोर्ट ने दिया आदेश संवैधानिक पदों पर शिवराज सरकार नहीं कर सकती कोई नई नियुक्ति, जानिए क्या है वजह

मध्यप्रदेश/भोपाल(Bhopal) – : मध्यप्रदेश(Madhyapradesh) कमलनाथ(Kamalnath) सरकार  में संवैधानिक पदों पर नियुक्त हुए अध्यक्ष समेत सदस्यों को शिवराज सरकार (Shivraj Government) ने आते ही हटा दिया , जिसके बाद 6  से ज्यादा याचिकाएं मध्य प्रदेश हाईकोर्ट(High Court) में लगाई जा चुकी हैं. अधिकांश मामलों में अदालत ने यथास्तिथि के आदेश दिए हैं.वही बुधवार को महिला आयोग की सदस्यों के निष्कासन पर भी मध्य प्रदेश हाईकोर्ट  ने यथास्तिथि के आदेश  दिया है. राज्य महिला आयोग की सदस्य रही जमुना मरावी(Jamuna maravi) और संगीता शर्मा(Sangeeta sharma) ने पद से अपने निष्कासन को हाईकोर्ट में चुनौती दी है. दोनों ही सदस्यों ने उनके निष्कासन को गलत ठहराते हुए उसे रदद् करने की मांग की है.

बुधवार को हाईकोर्ट में इस मामले में सुनवाई की गई. सुनवाई के समय मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने तात्कालिक राहत न देते हुए पद पर यथास्थिति बनाए रखने के आदेश को पारित किया है.अब इस आदेश के बाद मध्यम प्रदेश सरकार अब इन पदों पर तब तक कोई नई नियुक्ति नहीं कर सकती, जब तक न्यायालय इन याचिकाओं अपना फैसला नहीं सुना देती.  मंगलवार को अनुसूचित जाति आयोग के अध्यक्ष आनंद अहिरवार(Anand ahirwar) की याचिका पर भी हाईकोर्ट ने कुछ इसी तरह का आदेश पारित किया था.

कानूनी पेंचों में फंसी 4 प्रमुख आयोगों में नियुक्तियां

 कमलनाथ सरकार ने जाते-जाते चार प्रमुख आयोगों के  पदों पर आनन-फानन में नियुक्तियां कर दी थीं, जिन्हें शिवराज सरकार ने सत्ता में आते ही निरस्त कर दिया. संवैधानिक पदों पर हुई नियुक्तियों के निष्कासन के लिए कानूनी तौर पर बिना नियमों का पालन किए पद से अध्यक्ष समेत सदस्यों को अलग कर दिया गया. इन दलीलों के साथ करीब 6 याचिकाएं न्यायालय की दहलीज़ पर अब तक पहुंच गई हैं. अब तक प्रदेश के प्रमुख आयोग जिनमें राज्य महिला अयोग, युवा आयोग, अनुसूचित जाति आयोग, अनुसूचित जनजाति आयोग में हुई नियुक्तियां और फिर निरस्तगी कानूनी पेंच में फंसी है. कमलनाथ सरकार ने संवैधानिक पदों पर काबिज़ अध्यक्ष और सदस्यों को जहां राहत की उम्मीद है, वहीं प्रदेश सरकार कानूनन कार्यवाही पूरी होने तक किसी भी आयोग के पदों पर नई नियुक्ति फिलहाल नहीं कर सकती है

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