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विशेष रिपोर्ट:- 159 दिन में जितनी मौतें हुई, उतनी सिर्फ अप्रैल में, सरकार पूरी तरह से हुई फेल, सारे दावे झूठे 

विशेष रिपोर्ट:- 159 दिन में जितनी मौतें हुई, उतनी सिर्फ अप्रैल में, सरकार पूरी तरह से हुई फेल, सारे दावे झूठे 

 

 द लोकनीति डेस्क:गरिमा श्रीवास्तव

भारत में कोरोना मौत का दूसरा नाम बन चुका है.लगातार मौत के चौकाने वाले आंकड़े सामने आ रहे हैं. चार लाख से ज्यादा मरीज भारत में मिले. यह अब तक के सबसे बड़े आंकड़े हैं.

 मौत की वजह यह है कि कुछ मौतें कोरोना की वजह से हो रही है और ज्यादातर मौतें इलाज ना मिल पाने की वजह से.

 देश की सरकार के पास ना ही कोई प्लान है और ना ही कोई पॉलिसी, सरकार पूरी तरह से फेल है. लोग मर रहे हैं अपनों को खो रहे हैं पर सरकारी व्यवस्थाएं सुधरने का नाम नहीं ले रही हैं.

 Corona से अब तक जितनी मौतें हुई है उसका बड़ा हिस्सा यानी 60फ़ीसदी मौते दो टाइम पीरियड में हुई है.

 पहला 15 जून से 18 सितंबर 2020 के बीच कुल मौतों की करीब 38 फ़ीसदी मौतें हुई.

 और दूसरा एक 21 मार्च से 27 अप्रैल 2021 के बीच कुल मौतों की करीब 22 फ़ीसदी मौत हुई.

 विश्व की 40 फीसदी मौतें बीच के फेस यानी 18 सितंबर 2020 से लेकर 21 मार्च 2021 तक हुई. 15 जून से 18 सितंबर तक देश में कोरोना की पहली लहर तीव्र पर थी तब सबसे ज्यादा मौते हुईं.

 और 21 मार्च से लेकर अब तक कोरोना की दूसरी लहर तीव्र बनी हुइ है. और अब सबसे ज्यादा मौतें हो रही हैं.

 सरकार के नकारे पन से स्थिति हुई बद से बदतर 

 आप सब खुद जान लीजिये कि सरकार की नाकामी और नकारे पन की वजह से यह स्थिति बन गई. और सरकार पहली लहर को लेकर यह बात कहती है कि उन्होंने ना सिर्फ कोरोना से लड़ा है बल्कि जीत हासिल की है.

 जबकि इन दिनों जो आंकड़े हैं उन्हें देखकर यह बात साफ समझ में आ रही है कि दोनों ही लहर में सरकार कोरोना से हो रही मौतों को रोक पाने में पूरी तरह से असफल है. व्यवस्थाएं चरमरा चुकी हैं.

 कई राज्यों में अब तक 18 वर्ष से ऊपर के लोगों को लगने वाली वैक्सीन नहीं मिली:

18 वर्ष से अधिक लोगों को वैक्सीन लगाने की बात सरकार ने कही है पर कई राज्यों को अब तक वैक्सीन नहीं मिल पाई है.

 स्थिति बिगड़ चुकी है जाने कब संभलेगी कुछ नहीं कहा जा सकता है .

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