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इंदौर:-मौत का आंकड़ा छुपा रहा है प्रशासन, कलेक्टर पर भड़कीं इस्तीफ़ा देने वाली डॉक्टर,

मौत का आंकड़ा छुपा रहा है प्रशासन, कलेक्टर पर भड़कीं इस्तीफ़ा देने वाली डॉक्टर,

 

इंदौर:- इंदौर में मौत के मामले लगातार बढ़ते जा रहे हैं.कोरोना लगातार अपने पैर पसार रहा है.आज इंदौर की स्वास्थ्य अधिकारी डॉक्टर पूर्णिमा गाडरिया ने कही. उन्होंने कहा कि कलेक्टर समय बर्बाद करते हैं.वह समझते हैं कि सारा काम सिर्फ उन्हें ही आता है, लोग मर रहे हैं और कलेक्टरेट पर ताला लगा हुआ होता है. जनता परेशान है, आये दिन लोग अपने प्रियजनों को खो रहे हैं.लोगों के परिवार उजड़ गए हैं, और दो-दो घंटे मीटिंग में समय खराब किया जाता है. यहां सिर्फ राधास्वामी आश्रम पर फोकस किया जा रहा है जबकि ऑक्सीजन प्लांट लगाया जा सकता था, पर प्रशासन ने पूरी तरह लापरवाही बरती और सरकारी आंकड़े भी छुपाये जा रहे हैं.

 बता दे कि डॉ पूर्णिमा ने कलेक्टर मनीष सिंह के रवैया से परेशान होकर इस्तीफा दे दिया है. डॉ पूर्णिमा ने बताया कि कलेक्टर मनीष राधा स्वामी आश्रम में अस्थाई नर्सों की नियुक्ति के लिए रोजाना दबाव बनाते रहे हैं. जिला प्रशासन के अधिकारी कमरों में बैठे हुए हैं और यह लगातार सिर्फ स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को आर्डर देते रहें.

 प्रशासन सही तरीके से अपना काम नहीं कर रही है लोगों को ऑक्सीजन के किल्लत हो रही है दवाओं की किल्लत हो रही है पर कोई भी उनकी तरफ ध्यान नहीं दे रहा.

 असफलता के लिए स्वास्थ्य विभाग को बना रहे टारगेट :-

 अधिकारी डॉ पूर्णिमा ने कहा कि प्रशासन अपनी लापरवाही और अपनी असफलता का ठीकरा स्वास्थ्य विभाग पर फोड़ रही है. बातों ही बातों में डॉ पूर्णिमा ने यह बात कही है कि प्रशासन द्वारा मौतों का आंकड़ा लगातार छुपाया जा रहा हैं. स्वास्थ्य विभाग में स्टाफ कम है भर्ती की मांग लगातार की जा रही है पर प्रशासन इस तरफ बिल्कुल भी ध्यान नहीं दे रहा है.

 

पूरा घटनाक्रम

घटनाक्रम कुछ यूं हुआ कि कलेक्टर मनीष सिंह ग्रामीण क्षेत्र में बढ़ रहे कोरोना संक्रमण के मद्देनजर टीम के साथ बुधवार दोपहर खुड़ैल पहुंचे। यहां फीवर क्लीनिक पर एक मरीज ने िशकायत दर्ज कराई कि वह तीन-चार दिन से चक्कर लगा रहा है, लेकिन दवाई नहीं मिल पा रही है। इस पर कलेक्टर ने जिला स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. पूर्णिमा गडरिया को फोन लगाया। इसके कुछ देर बाद ही डॉ. गडरिया ने अपना इस्तीफा भेज दिया। दूसरी घटना मानपुर की है, जहां के मेडिकल ऑफिसर (सीएमओ) डॉ. आरएस तोमर ने भी इस्तीफा दे दिया है। उनका भी यही आरोप है कि एसडीएम अभिलाष मिश्रा बहुत अभद्रतापूर्वक बात करते हैं। इसके पहले अफसरों की बैठक में डांट-फटकार के बाद तत्कालीन सीएमएचओ डाॅ. प्रवीण जड़िया की तबीयत बिगड़ गई थी और उन्हें अस्पताल में भर्ती होना पड़ा था।

 

डॉ. गाडरिया बोलीं – मुझसे कहा-इस्तीफा दे दो नहीं तो सस्पेंड कर दूंगा

“कुछ दिन से कलेक्टर फोन पर अभद्रता से ही बात कर रहे हैं। उनकी नाकामी का ठीकरा हम पर फोड़ रहे हैं। चार दिन पहले स्टाफ कुछ बेड अपने लिए सुरक्षित रखने का इच्छुक था। इस पर कलेक्टर ने कहा कि बकवास बंद करो। आपको 24 घंटे में हटा सकता हूं। दो दिन पहले रेसीडेंसी में भी बद्तमीजी की गई। बुधवार को फीवर क्लिनिक पर किसी मरीज को गोली नहीं मिली तो कहा कि इस्तीफा दे दो, नहीं तो मैं सस्पेंड कर दूंगा। हर बार कहते हैं कि स्वास्थ्य विभाग निकम्मा है। वे जब नाकाम होते हैं, जिम्मेदारी हम पर डाल देते हैं।

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