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डिंडौरी : आदिवासी बहुल ज़िले की ऐसी दुर्दशा, न संयुक्त, न डिप्टी कलेक्टर, न तहसीलदार…प्रभारियों के भरोसे कई विभाग

डिंडौरी : मध्यप्रदेश के डिंडौरी ज़िले से एक ऐसा मामला सामने आया है जहां कई महत्वपूर्ण पद अभी भी खाली पड़े है। हालात ये है कि जिले में दो दर्जन से अधिक जिला कार्यालय प्रभारियों के भरोसे ही संचालित हो रहे हैं। 

विभाग प्रमुख न होने से विभागीय काम बुरी तरह प्रभावित हो रहें हैं। बताया गया कि महत्वपूर्ण विभागों में अधिकारियों की पदस्थापना न होने से जिम्मेदारी तय नहीं हो पाती और कामकाज प्रभावित होता है।

वहीं, इस पूरे मामलें पर ज़िले के कलेक्टर रत्नाकर झा का कहना है कि समस्या तो जरूर है, लेकिन शासन की योजनाओं का बेहतर क्रियान्वयन हो इसको लेकर पूरा प्रयास किया जाता है। विभाग प्रमुखों की पदस्थापना से कार्य और आसान होगा। उन्होंने बताया कि जिले के दो दर्जन से अधिक विभागों में विभाग प्रमुख नहीं हैं, और इस संबंध में पत्राचार किए जा रहे हैं।

जबकि, केंद्रीय राज्यमंत्री फग्गन सिंह कुलस्ते ने कहा कि जिले में कई विभागों में विभाग प्रमुख की पदस्थापना न होने की समस्या मेरी जानकारी में है। इस संबंध में मुख्यमंत्री से मिलकर यह समस्या रखी जाएगी। विभाग प्रमुखों की पदस्थापना कराने का प्रयास किया जाएगा।

बताते चलें कि आदिवासी बहुल जिले डिंडौरी में केंद्र व राज्य सरकार द्वारा तमाम योजनाएं तो संचालित की जाती हैं, लेकिन योजनाओं को क्रियान्वित करने के लिए विभागीय अधिकारियों की ही पदस्थापना नहीं की जाती। 

जिसके कारण कई महत्वपूर्ण विभाग ऐसे है जो प्रभारियों के भरोसे संचालित हो रहे हैं। इन पदों की पदस्थापना लंबे समय से नहीं हो पाई है। जिसके कारण शासन की योजनाओं को बेहतर ढंग से क्रियान्वित कराना कलेक्टर के समक्ष भी बड़ी चुनौती बनी हुई है।

गौरतलब है कि जिले में संयुक्त कलेक्टर से लेकर डिप्टी कलेक्टर, तहसीलदार तक के पद भी खाली हैं। ऐसे में  कर्मचारियों की कमी से जूझ रहे विभाग दिशा निर्देश आने वाले अधिकारी की कमी से भी जूझ रहे हैं।

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