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सीएम शिवराज करते रहते हैं स्वास्थ्य सेवाएं बढ़ाने का दावा लेकिन हॉस्पिटल बेड आईसीयू और डॉक्टर बनने की बजाय कम हुए

प्रकाशित:
लेखक: thelokniti
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सीएम शिवराज करते रहते हैं स्वास्थ्य सेवाएं बढ़ाने का दावा लेकिन हॉस्पिटल बेड आईसीयू और डॉक्टर बनने की बजाय कम हुए
  • शिवराज सरकार के सारे दावे फेल
  • दूसरी लहर के बाद स्वास्थ्य सेवाएं बढ़ाने का किया था दावा
  • शहर में हॉस्पिटल बेड आईसीयू और डॉक्टर हुए कम
  • सार्थक पोर्टल पर स्वास्थ्य विभाग और निजी अस्पताल में मौजूद संसाधनों ने खोली पोल 

भोपाल:- मध्य प्रदेश में कोरोना की दूसरी लहर की वजह से भारी क्षति हुई जिसके बाद सरकार यह बातें कह रही थी कि स्वास्थ्य सेवाएं बढ़ा दी गई हैं. लेकिन सार्थक पोर्टल पर स्वास्थ्य विभाग और निजी अस्पताल में मौजूद संसाधनों की पोल खुल गई है। मध्यप्रदेश में कोरोना की तीसरी लहर दस्तक दे चुकी है। राजधानी भोपाल में पॉजिटिविटी रेट बढ़ कर 10 से ज्यादा हो गया है। 

सरकार यह दावा कर रही थी कि दूसरी लहर के मुकाबले राजधानी सहित पूरे प्रदेश में कोरोना से बचने के लिए ज्यादातर संसाधन उपलब्ध करा दिए गए हैं लेकिन सरकारी दावे झूठे साबित हो गए हैं. दूसरी लहर के मुकाबले हॉस्पिटल बेड और डॉक्टरों की संख्या बढ़ने की जगह घट चुकी है. और यह खुलासा हुआ है सरकार के सार्थक पोर्टल की तुलनात्मक रिपोर्ट से…

सार्थक पोर्टल पर दूसरी लहर में 24 मई और वर्तमान संसाधनों की जानकारी पर रिपोर्ट जारी की गई है। दूसरी लहर में जहां भोपाल में 135 डॉक्टर के वहां अब सिर्फ 96 डॉक्टर हैं.दूसरी लहर में 2976 आइसोलेशन बेड थे लेकिन इस वक्त 2357 आइसोलेशन बेड हैं। राजधानी भोपाल में दूसरी लहर में 3927 ऑक्सीजन बेड थे, इस वक्त 24 ऑक्सीजन बढ़कर 3951 हो चुके हैं। आईसीयू एचडीयू की अगर संख्या देखें तो दूसरी लहर में 2044 बेड थे और वर्तमान में 1974 बेड है। 

पूरे मध्यप्रदेश का आंकड़ा भी कुछ इसी तरह है.

स्वास्थ्य व्यवस्थाओं को लेकर सरकार के दावे फेल होते हुए जेपी अस्पताल में भी नजर आ रहे हैं. जेपी जिला अस्पताल में को बैठक के दौरान अव्यवस्थाओं के कारण बीमार लोग परेशान हो रहे हैं. सर्वर भी कई बार ठप हो जाता है। कोविड टेस्ट के लिए भी लोगों को इंतजार करना पड़ रहा है बैठने तक की भी व्यवस्था नहीं है। आए दिन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान समीक्षा बैठक आपात बैठक कर रहे हैं लेकिन जमीन पर इनकी बैठकों का असर दिखाई नहीं दे रहा है आगे देखना होगा कि संसाधनों को लेकर सरकार क्या सुधार करती है या फिर इन बड़ी लापरवाही की वजह से तीसरी लहर भी भयावह होगी। 

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