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शिवराज सरकार को बड़ी राहत, सिंधिया गुट के मंत्रियों का खतरा भी टल

मध्यप्रदेश/जबलपुर – पिछले साल मार्च महीने में हुए बड़े सियासी उलटफेर के दौरान ज्योतिरादित्य सिंधिया खेमे के 22 विधायक भाजपा में चले गए थे। इस दलबदल के कारण कांग्रेस सरकार गिर गई थी, जिसके बाद भाजपा सरकार बनाने में सफल रही और शिवराज सिंह चौहान चौथी बार मुख्यमंत्री बने। इसके बाद तीन और कांग्रेस विधायकों ने इस्तीफा देकर भाजपा का दामन थाम लिया। इन पूर्व विधायकों में से दो को पहले मंत्रिमंडल गठन में स्थान मिला और फिर कैबिनेट विस्तार में 12 पूर्व विधायकों को मंत्री बनाया गया। इसके बाद उपचुनाव हुए और तीन मंत्रियों को छोड़कर बाकी सभी उपचुनाव जीत कर फिर से विधायक बन गए। 

इस पुरे मामले को लेकर मध्यप्रदेश के छिंदवाड़ा निवासी अधिवक्ता आराधना भार्गव की ओर से जबलपुर हाई कोर्ट में दायर की गई एक याचिका में कहा गया था कि कांग्रेस छोड़ बीजेपी में आए विधायकों को मंत्री पद दे दिया गया, जो कि संविधान के अनुरूप नहीं था। याचिका में दल बदल कर सरकार बनाने का आरोप लगाया गया था। विधायक पद छोड़ चुके उम्मीदवारों को मंत्री बनाने पर भी सवाल उठाए गए थे और मांग की गई थी कि सरकार को बर्खास्त किया जाए। 

हालांकि, इस मामले में जबलपुर हाई कोर्ट से शिवराज सरकार को बड़ी राहत तो मिली ही है, साथ ही ज्योतिरादित्य सिंधिया गुट के मंत्रियों का खतरा भी फिलहाल टल गया हैं। दरअसल, आराधना भार्गव की इस याचिका पर कोर्ट ने कहा कि वर्तमान में सभी विधायक पुनः चुनाव लड़ चुके हैं और कई मंत्री पद पर हैं इसलिए ऐसे में अब याचिका पर सुनवाई औचित्यहीन हैं। 

गौरतलब है कि इस मामले पर हाईकोर्ट ने पूर्व में सरकार को नोटिस जारी किया था। सरकार ने अपने जवाब में कहा था कि जिन 14 विधायकों के खिलाफ यह याचिका दायर की गई है उन्होंने फिर से उपचुनाव में जीत हासिल कर ली है और मंत्री बन गए हैं। लिहाजा अब इन हालातों में इस याचिका का कोई आधार नहीं रह जाता। वहीं, हाईकोर्ट ने भी सरकार के इस तर्क को माना हैं। 
 

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