कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह को बड़ा झटका, हाई कोर्ट ने निरस्त की याचिका, भाजपा पर लगाया था आरोप

ग्वालियर। विधानसभा चुनावों से पहले हाई कोर्ट द्वारा याचिका का निरस्त होना दिग्विजय सिंह के लिए बहुत बड़ा झटका है। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की जबलपुर बेंच ने मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह की उस याचिका को निरस्त कर दिया गया, जिसमें उन्होंने अपने विरुद्ध ग्वालियर न्यायालय में चलने वाले मानहानि के मुकदमे को रद करने की मांग की थी। अब पूर्व मुख्यमंत्री पर ग्वालियर में मुकदमा चलता रहेगा।
यहां बता दें कि अगस्त 2019 में भिंड के दौरे पर आए कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने एक पत्रकारवार्ता में पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई के लिए भारतीय जनता पार्टी पैसे लेकर हिंदुस्तान की जासूसी करने का आरोप लगाया और कहा कि इस पर पत्रकार बंधुओं को ध्यान देना चाहिए। इस वक्तव्य को मानहानि मानते हुए अधिवक्ता अवधेश सिंह भदौरिया ने दिग्विजय सिंह के खिलाफ भारतीय दंड विधान की धारा 499, 500 के तहत न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी ग्वालियर में परिवाद प्रस्तुत किया था। हाईकोर्ट ने दिग्विजय सिंह के विरुद्ध इस मामले को सही माना और मजिस्ट्रेट न्यायालय की कार्रवाई को सही मानते हुए दिग्विजय सिंह की याचिका को खारिज कर दिया।
एडवोकेट अवधेश भदौरिया ने दायर किया है परिवाद
दिग्विजय सिंह के उक्त वक्तव्य को मानहानिकारक मानते हुए भाजपा के नेता एवं मध्य प्रदेश हाई कोर्ट खंड पीठ ग्वालियर के अधिवक्ता अवधेश सिंह भदौरिया ने उनके विरुद्ध भारतीय दंड विधान की धारा 499, 500 के तहत न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी ग्वालियर के न्यायालय में परिवाद पत्र प्रस्तुत किया जहां पर अधिवक्ता भदौरिया द्वारा दिग्विजय सिंह के विरुद्ध उक्त वक्तव्य के संबंध में सारे साक्ष्य प्रस्तुत किए गए, उन्होंने पत्रकार वार्ता की वह वीडियो सीडी भी प्रस्तुत की गई जिसमें दिग्विजय सिंह द्वारा भारतीय जनता पार्टी पर उक्त आरोप लगाए गए।
भदौरिया ने दिग्विजय के आरोपों की मंशा को किया जाहिर
अधिवक्ता भदौरिया द्वारा न्यायालय में तर्क दिया गया कि भारतीय जनता पार्टी पिछले लोकसभा चुनाव में प्रचंड बहुमत से विजय हुई थी और कांग्रेस पार्टी को विपक्ष का नेता बनाने लायक भी बहुमत प्राप्त नहीं हुआ इसलिए भारतीय जनता पार्टी की समाज में मानहानि करने के उद्देश्य से एवं वोटों के ध्रुवीकरण के लिए दिग्विजय सिंह द्वारा उक्त असत्य एवं निराधार आरोप भारतीय जनता पार्टी पर लगाए गए जबकि उनके आरोपों के संबंध में देश में कहीं पर भी एक भी प्रमाण नहीं है कि भारतीय जनता पार्टी जासूसी के मामले में लिप्त है।


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