भोपाल, शहडोल: नौसीखिया डाॅक्टरों के हवाले शहडोल जिला चिकित्सालय, जांच रिपोर्ट में डाॅक्टरों को मिली क्लीन चिट से जाहिर है कि मध्यप्रदेश की सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था चरमरा चुका है ?

भोपाल, शहडोल: नौसिखिया डाॅक्टरों के हवाले शहडोल जिला चिकित्सालय, जांच रिपोर्ट में डाॅक्टरों को मिली क्लीन चिट से जाहिर है कि मध्यप्रदेश की सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था चरमरा चुका है ?
8 मासूम बच्चों की मौत को कैसे पचाएंगे प्रदेश के मुखिया शिवराज सिंह चौहान, रिक्त पदों को समय रहते न भरने से सवालों के कटघरों में खडी मध्यप्रदेश सरकार ?
भोपाल/राजकमल पांडे। मध्यप्रदेश सरकार स्वास्थ्य व्यवस्था के नाम पूरा शासकीय कोष खाली कर दिया और व्यवस्था दुरुस्त करने के नाम पर बडी-बडी ढींगे हांकते है. पर जब इन सरकारों के योजना और व्यवस्था की जमीनी हकीकत खांघाला जाए तो ज्ञात होता है कि सरकारी फाईलों में बेहतर स्वास्थ्य व्यवस्था देने के नाम पर कितना विषाल जंगल का फैलाव है। इतना ही नही जब भी सरकारी अस्पतालों में किसी मरीज या शिशुओं की मौत होती है. तो यही कहके बात टाल दिया जाता है कि हमने बचाने का भरसक प्रयास किया पर बचा नही पाए. और यही हुआ शहडोल जिला चिकित्सालय में भी जहां 6 दिनों के भीतर 8 मासूम बच्चों की मौत हो गई। जिस पर प्रदेश के मुखिया शिवराज सिंह चैहान ने अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए डाॅक्टरों को फटकार लगाया था. जिसके बाद 8 मासूम बच्चों के मौत की वजह जानने के लिए भोपाल से जांच टीम भेजी गई थी। जिसमें जांच अधिकारी सुभाष चंद्र बोस मेडिकल काॅलेज जबलपुर के सीनियर डाॅक्टर पवन घनघोरिया और असिस्टेंट प्रोफेसर डाॅ. अखिलेन्द्र सिंह परिहार जिन्होंने अपनी जांच रिपोर्ट स्वास्थ्य आयुक्त डाॅ. मोयल, को सौपी है। डाॅ. गोयल ने वह जांच रिपोर्ट नेशनल हेल्थ मिशन की एमडी छवि भारद्वाज को यह कहके सुपुर्द कर क्लीन चिट दिया है कि शहडोल के डाॅक्टरों ने बच्चों को बचाने हेतु प्रारंभिक उपचार अच्छे से किया था। डाॅ. गोयल ने कहा कि जिन बच्चों की मौत हुई उन्हें जबलपुर रैफर किया गया था। लेकिन उनके परिजनों ने ले जाने से मना कर दिया।
अब सवाल यह उठता है कि शहडोल जिला चिकित्सालय में बेहतर स्वास्थ्य के नाम पर राज्य से लेकर केन्द्र सरकार के कोष खाली हो रहे हैं फिर 8 मासूम बच्चों की मौत को प्रदेश के मुखिया शिवराज सिंह चौहान कैसे पचा पाएंगे।
शहडोल अस्पताल में 7 से 8 शिशु रोग चिकित्सकों का पद है खाली
शहडोल जिला चिकित्सालय मे औसतन हर दिन एक बच्चे की मौत हुई है. नवम्बर में एसएनसीयू में 190 बच्चे भर्ती हुए. जिसमें से 24 की मौत हुई है। इसी तरह पीआईसीयू में 7 बच्चों की मौत हुई. 8 बच्चों की मौत हाल ही में 6 दिनों के भीतर हुआ। वहीं जिला चिकित्सालय में शिशु रोग चिकित्सकों के 7 से 8 पद खाली हैं। प्रदेश के मुखिया शिवराज ने कहा था कि जो दोषी पाया जाएगा उन पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। ऐसे में जांच टीम डाॅ. पवन घनघोरिया और असिस्टेंट प्रोफेसर डाॅ. अखिलेन्द्र सिंह परिहार की जांच रिपोर्ट संदेह पैदा करती है कि जब 7 से 8 शिशु रोग चिकित्सकों का पद शहडोल जिला चिकित्सालय में रिक्त है, तो 8 मृतक बच्चों का प्रारंभिक उपचार बेहतर कैसे संभव हुआ होगा, 8 मृतक मासूमों का बेहतर इलाज हुआ होगा का दावा बेबुनियाद है। इससे साफ जाहिर होता है कि जांच टीम ने एक तरफा जांच रिपोर्ट बनाकर डाॅ. संजय गोयल को सुपुर्द कर दोषियों को बचाने का प्रयास कर रही है। इसमें अगर शहडोल जिला चिकित्सालय के डाॅक्टर दोषी नही हैं तो फिर क्या परिजनों पर दोष मडना कि हमने जबलपुर रैफर किया था परिजन ले जाने से मना कर दिए, कहां तक न्याय संगत है।
शिवराज के फटकार हैं खोखले, नहीं होते लापरवाह अधिकारी सीधे?

सीएमएचओ डाॅ. राजेश पांडे ने कहा कि एसएनसीयू और पीआईसीयू में 20 बेड हैं, जिसमें 14 लोगों की पोस्ट है। सिर्फ 6 ही काम कर रहें हैं. आठ पद रिक्त हैं. और अपना पल्ला बचाते हुए डाॅ. पांडे ने कहा कि जहां तक डाॅक्टरों का सवाल है तो मेडिकल काॅलेज के 2 असिस्टेंट प्रोफेसर और 4 रेजीडेंट डाॅक्टर सहयोग कर रहे हैं। डाॅ. पांडे के कथन से जाहिर होता है कि व्यवस्था देने के नाम पर खानापूर्ति करने हेतु मेडिकल काॅलेज के सहायक प्राध्यापक डाॅ. निषांत प्रभाकर को एसएनसीयू एवं पीआईसीयू का प्रभारी बना रखा है और इनके साथ मेडिकल काॅलेज के ही 4 सीनियर रेजीडेंट डाॅक्टर व एक कंसलटेंट डाॅक्टर को भी अटैच कर रखा है। जाहिरन प्रदेश के मुखिया शिराज सिंह चौहान प्रदेश की जनता को बेहतर स्वास्थ्य व्यवस्था देने में फिस्डी साबित हो गए हैं। अब देखना यह है कि जो जांच रिपोर्ट प्रेषित की गई है उससे संतुष्ट होकर मामला ठंडे बस्ते में डालते हैं या फिर शहडोल जिला चिकित्सालय के डाॅक्टरों की लापरवाही के सहित जांच टीम के ऊपर भी एक और जांच बैठाते हैं या फिर 8 मासूम बच्चों के मौत का मामला भी कोई राजनीतिक तूल पकडेगा।


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