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भोपाल : पहले सरकार ने कोरोना वॉरियर्स पर बरसाए फूल, अब मारी पेट पे लात, PPE किट पहन सिग्नल पर मांग रहे है भीख

भोपाल : कोरोनाकाल के दौरान अस्पतालों में डॉक्टरों और स्टाफ की कमी को देखते हुए कोरोना वॉरियर्स ने कई अस्पतालों में जी जान से अपनी सेवाएं दी थी। इन कोरोना वॉरियर्स ने अपनी न अपने परिवार की चिंता करते हुए कोरोनाकाल के दो सालों में संक्रमितों की सैंपलिंग, टेस्टिंग, कॉन्टेक्ट ट्रेसिंग की। उस दौरान सरकार की और से आसमान से गुलाब के फूल बरसाए थे। कई फोरमों पर सम्मान किया था। 

लेकिन अब इन कोरोना वॉरियर्स की ज़रूरत ख़त्म होते ही सरकार ने इनकी सेवाएं खत्म कर दी है। बताया जा रहा है कि 4000 डॉक्टर और पैरामेडिकल स्टाफ सहित सभी अस्थाई कर्मचारियों को हटा दिया है। इनमें भोपाल के करीब 250 कोरोना वॉरियर्स शामिल हैं। नेशनल हेल्थ मिशन (एनएचएम) ने बजट न होने का हवाला दिया है। 

वहीं, एनएचएम से 31 मार्च को सेवाएं समाप्त किए जाने के बाद इन योद्धाओं ने राजधानी में डे़रा डाल लिया है। बता दे कि कोरोना योद्धा इन दिनों भोपाल के बोर्ड ऑफिस चौराहे पर भीख मांग रहे हैं। सिग्नल पर गाडियां खड़ी होते ही पीपीई किट में एनएचएम द्वारा हटाए गए अस्थाई कोरोना योद्धा कटोरा लेकर भीख मांगने पहुंच जाते हैं। इतना ही नहीं वाहन चालकों को निष्कासित कोरोना योद्धा अपनी आपबीती भी सुना रहे है की किस तरह सरकार ने उनका मज़ाक बनाया। 

इधर, कोविड-19 योद्धा संघर्ष संगठन मप्र के कार्यकारी अध्यक्ष देवेंद्र सूर्यवंशी ने बताया कि सरकार की यूज एंड थ्रो पॉलिसी नहीं चलेगी। विरोधस्वरूप कोरोना वॉरियर्स शहर के अलग-अलग इलाकों में पीपीई किट पहनकर भीख मांग रहे हैं। इससे मिली राशि सरकार के में खजाने में जमा कराएंगे। उन्होंने बताया कि एनएचएम ने बजट न होने का हवाला देकर 4 हजार से ज्यादा लोगों को बेरोजगार कर दिया है। 

डॉ.देवेन्द्र सूर्यवंशी ने कहा कि वित्त मंत्री, स्वास्थ्य मंत्री से मिलने के बाद कोरोना योद्धाओं ने बोर्ड ऑफिस चौराहे पर भीख मांगी है। जब तक हमारी संविदा नियुक्ति के आदेश नहीं हो जाते हम अपने घर वापस नहीं जाएंगे।

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