दूसरे राज्यों में अतिथि विद्वानों को मिलता है सम्मानजनक मानदेय, मध्यप्रदेश में है सेवा से बाहर, शिवराज सरकार नहीं ले रही सुध
.jpeg)
दूसरे राज्यों में अतिथि विद्वानों को मिलता है सम्मानजनक मानदेय, मध्यप्रदेश में है सेवा से बाहर, शिवराज सरकार नहीं ले रही सुध
भोपाल/गरिमा श्रीवास्तव:- 20 से 25 साल तक प्रदेश के शासकीय महाविद्यालयों में अध्यापन कार्य करवाने वाले अतिथि विद्वानों को अन्य राज्य जैसे – दिल्ली, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश आदि की तर्ज पर एक फिक्स मानदेय तक नहीं दिया जाता है। वर्तमान में 1500 रुपए प्रति कार्य दिवस और 30000 हजार रुपये किसी माह में 20 दिन कार्य दिवस या उससे कम होने पर दिया जाता है। उक्त मानदेय भी 1 जुलाई 2018 से ही लागू हुआ है। इससे पूर्व अलग-अलग प्रति कालखंड दर जैसे – 80, 100, 120, 275 रुपए आदि थे। जो एक दिवस में अधिकतम 3 कालखण्ड लेने तक सीमित था। जिससे मात्र एक माह में छः हजार से पन्द्रह हजार तक ही मानदेय बनता था। छुट्टियों अथवा परिवार में किसी की मौत हो जाने, बीमार हो जाने या आवश्यक कार्य आ जाने के कारण अनुपस्थित रहने पर कोई मानदेय नहीं मिलता है।
वर्तमान शिवराज सरकार ने पूर्व कमलनाथ सरकार के दौरान इनके लिए सड़क, विधानसभा और इनके आंदोलन स्थल शाहजहांनी पार्क भोपाल तक इनका साथ दिया था और स्वयं वर्तमान सीएम शिवराज सिंह चौहान व उनके कई मंत्रियों ने कहा था कि, हमारी सरकार आने पर हम इनको नियमित भी करेंगे और फाॅलेन आउट अतिथि विद्वानों को शीघ्र सेवा में भी लेंगे। परंतु पूर्व कमलनाथ सरकार द्वारा इनको नियमित करने का वचन देकर भी इनके पदों पर नियमित भर्ती की नियुक्ति करके 2500 से अधिक अतिथि विद्वानों को फाॅलेन आउट कर दिया था। लेकिन उनमें से 500 से 600 के लगभग अभी भी व्यवस्था में नहीं आ पाए हैं।
वहीं शिवराज सरकार भी पिछले करीब डेढ़ साल से इनको झूठे आश्वासन देकर केवल टाइम पास करने में ही लगी है। प्रति सप्ताह की च्वाईस फिलिंग में 2 से 5 पद सभी विषयों में निकालकर इनको बरगलाया जा रहा है। जिससे यह नेट, सेट, एमफिल, पीएचडी जैसी योग्यताधारी उच्च शिक्षित लोग बहुत परेशान हो गए हैं।
अतिथि विद्वान नियमितीकरण संघर्ष मोर्चा के मीडिया प्रभारी शंकर लाल खरवाडिया का इस बारे में कहना है कि, सरकार ने हमारे जीवन यापन के लिए अब तक न तो फिक्स मानदेय दिया है और न ही कोई सुरक्षित भविष्य की पहल की है। उल्टा नव चयनित सहायक प्राध्यापक, ग्रंथपाल, क्रीड़ा अधिकारी और प्रोफेसरों के ट्रांसफर आए दिन हमारे पदों पर किए जा रहे हैं।
आखिर इतने वर्षों से सेवा देने के बाद भी सरकार हमारे साथ इतना अन्याय क्यों कर रही है?
अतिथि विद्वानो ने कहा कि अगर यही स्थिति रही तो एक-एक कर सभी अतिथि विद्वान आत्महत्या करते रहेंगे




