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आदित्य L1 से खुलेंगे सूरज के रहस्य: संचार तकनीक की बाधा दूर करने में रामबाण साबित होगा मिशन

अंतरिक्ष के क्षेत्र में भारत ने एक और बड़ी उपलब्धि हासिल कर ली है। देश अभी चंद्रयान-3 मिशन की सफलता का जश्न मना ही रहा था कि इस बीच ISRO ने एक कदम आगे बढ़ाते हुए अपना सूर्य मिशन आदित्य एल-1 लॉन्च कर दिया है। अब 127 दिन बाद यह सैटेलाइट एल-1 के पॉइंट तक पहुंचेगा। जहा से यह वैज्ञानिकों तक अहम जानकारीयां पहुचायेगा। भारत के साथ-साथ पूरी दुनिया की नजर हिन्दुस्तान के इस सूर्य मिशन पर है। आपको बता दें कि आदित्य एल-1 का लक्ष्य सूर्य के निकट मौजूद L-1 पॉइंट तक पहुंचना है। इस बिंदू को लैरेंज पॉइंट कहा जाता है जिसका नाम मशहूर गणितज्ञ जोसेफी-लुई लैरेंज के नाम पर रखा गया है। एल-1 सूर्य और पृथ्वी के बीच मौजूद वह पॉइंट है जहां कोई सैटेलाइट या खगोलीय पिंड सूर्य और पृथ्वी दोनों के गुरुत्वाकर्षण से बचा रहता है। चंद्रयान-3 के बाद यह अंतरिक्ष के क्षेत्र में भारत की एक और बड़ी छलांग है।

क्या है लैग्रेंजियन बिंदु, सूर्य का अध्ययन इसी जगह से क्यों
सूर्य के पास किसी सैटेलाइट को भेजना बेहद चुनौतीपूर्ण कार्य है। क्योंकि इसके केंद्र का तापमान 1.50 करोड़ डिग्री सेल्सियस है। इसे लेकर इसरो के पूर्व वैज्ञानिक डॉ. सीएम नौटियाल ने बताया कि सूर्य के व्यवहार का पता लगना बहुत अहम है। अगर यह पता लगाने में हम कामयाब हो जाते हैं तो मानव जाति के विकास से जुड़ी कई समस्याओं का हल हो सकता है। सूरज पर जो तूफान आते हैं उसे सोलर स्ट्रॉम कहते हैं। आदित्य एल1 के जरिए हम इस सोलर स्ट्रॉम’ का पता लगा सकते हैं। यदि हमें सूरज के मिजाज और वहां आने वाले तूफान का पता चल जाएगा तो दुनिया में संचार तकनीक की बाधाओं को दूर करने में बड़ी सफलता मिलेगी। पृथ्वी से 15 लाख किलोमीटर की दूरी पर स्थित इसे लैग्रेंजियन बिंदु 1 पर भेजा जाना है। इस बिंदु तक मिशन को पहुंचने में लगभग चार महीने का वक्त लगेगा। लैग्रेंजियन बिंदु अंतरिक्ष में वह स्थान होते हैं जहां दो वस्तुओं के बीच कार्य करने वाले सभी गुरुत्वाकर्षण बल एक-दूसरे को निष्प्रभावी कर देते हैं। लैग्रेंजियन बिंदु में एक छोटी वस्तु दो बड़े पिंडों (सूर्य और पृथ्वी) के गुरुत्वाकर्षण प्रभाव के तहत संतुलन में रह सकती है। इस वजह से एल1 बिंदु का उपयोग अंतरिक्ष यान के उड़ने के लिए किया जा सकता है।

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