MP : बच्चों को डायरिया से बचाने वाले ORS और जिंक जैसी साधारण दवाओं का स्टॉक नहीं, बढ़ा मौत का आकड़ा, हुआ ये खुलासा

भोपाल : मध्यप्रदेश में निमोनिया से होने वाली बच्चों की मौतें बीते साल 2020-21 के मुकाबले इस साल 2021-22 में 65 फीसदी तक बढ़ गई हैं। पिछले साल प्रदेश में निमोनिया से 9559 बच्चों की मौतें हुई थीं। इस साल 25,987 बच्चों की निमोनिया से जान गई है।
यह जानकारी गुरुवार को हुई शिशु स्वास्थ्य कार्यक्रम की समीक्षा बैठक में सामने आई है।
एनएचएम में हुई समीक्षा में ये जानकारी सामने आई की, निमोनिया ग्रस्त बच्चों को अमोक्सीसीलीन सीरप दिया जाता है। लेकिन बडवानी, दतिया, खंडवा, श्योपुर, धार, ग्वालियर, विदिशा में इस सीरप का स्टॉक ही नहीं हैं। जबकि, प्रदेश के करीब 14 जिलों में जेंटामाइसिन 40 Mg की भारी कमी है। सीधी, श्योपुर और जबलपुर में स्टॉक शून्य है। वहीं, बड़वानी, रीवा में तिमाही जरूरत के हिसाब से 2%, विदिशा में 6%, उमरिया, रायसेन में 7%, मंदसौर में 25%, भोपाल में 27%, ग्वालियर में 35% स्टॉक है।
चिंताजनक बात यह भी है कि कई जिलों में बच्चों को डायरिया से बचाने वाले ORS और जिंक जैसी साधारण दवाओं का स्टॉक नहीं है।
गौरतलब है कि पांच साल तक की उम्र के बच्चों की मौतों के मामले में MP देश के खराब राज्यों में शुमार है। शिशु मृत्यु दर (आईएमआर) को सुधारने के लिए स्वास्थ्य विभाग और एनएचएम करोड़ों रुपए का बजट हर साल खर्च करता है। इसके बावजूद जिलों के अधिकारी इस ओर गंभीर नहीं हैं।




