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मध्य प्रदेश शिशुओं को लावारिस छोड़ने में दूसरे नंबर पर: NCRB रिपोर्ट 

भारत का ये राज्य शिशुओं को लावारिस छोड़ने में दूसरे नंबर पर: NCRB रिपोर्ट 

भोपाल/निशा चौकसे:- मध्य प्रदेश वो राज्य है जिसके इंदौर शहर को हर वर्ष स्मार्ट सिटी में प्रथम अवॉर्ड मिलता है. तो वहीं दूसरी तरफ अब मध्य प्रदेश शिशुओं को लावारिस छोड़ने में दूसरे नंबर पर है. मध्य प्रदेश एक ऐसा राज्य बन गया है. जहां शिशुओं की हत्या, शिशुओं को लावारिस छोड़ना, महिला अपराध, रोजाना बलात्कार की खबरें आना आम बात हो गई है.
हाल ही में एनसीआरबी 2020 की रिपोर्ट सामने आई है जिसमें मध्य प्रदेश शिशुओं को लावारिस छोड़ने में दूसरे स्थान पर रहा है. तो वहीं दिल्ली में साल 2015 और साल 2020 के बीच किसी भी भारतीय शहर में लावारिस छोड़े गए शिशुओं के सबसे अधिक मामले सामने आए हैं. इसके साथ ही महाराष्ट्र में भी लावारिस छोड़े गए बच्चों के 6459 मामलें सामने आए हैं. जो राष्ट्रीय आंकड़ों का 18.3% है. 

इन राज्यों में यह है स्थिति
पूरे देश भर में लावारिस छोड़े जाने वाले शिशुओं में कई सारे राज्य हैं जिसमें महाराष्ट्र में 1184 मामले हैं तो वहीं मध्यप्रदेश में 1161, राजस्थान में 814, कर्नाटक 771, गुजरात 650, शहरों के यह आंकड़े हैं इसके साथ ही दिल्ली 221 मामलों के साथ सबसे ऊपर है इनके अलावा देश के और भी कई राज्य इनमें शामिल हैं. 

बच्चों को लावारिस छोड़ने की क्या है वजह?
बच्चों को लावारिस छोड़ने में ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्र शामिल हैं. शहरी क्षेत्र में शिशुओं को लावारिस छोड़ने का कारण है आर्थिक तंगी और ग़रीबी से त्रस्त होकर शहरी क्षेत्रों के लोग यह कदम उठाते हैं और ग्रामीण क्षेत्रों में यह धारणाएं होती हैं कि यदि बच्ची पैदा होगी तो दहेज देना पड़ेगा और आने वाले समय में आर्थिक तंगी का भी सामना करना पड़ेगा ग्रामीण क्षेत्रों का ये एक मुख्य कारण माना जा सकता है. प्रशासनिक भाषा में बच्चों को लावारिस छोड़े जाने के मामलों को तीन श्रेणियों में गिना जाता है जिसमें शिशु हत्या, भ्रूण हत्या और बच्चों को लावारिस छोड़ना शामिल है.

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