गुमराह और झूठ बोलने की राजनीति छोड़ तत्काल आरक्षण का लाभ पिछड़ा वर्ग को अविलंब दिया जाए: कमलनाथ

भोपाल/निशा चौकसे:- मध्यप्रदेश में कई दिनों से लगातार ओबीसी आरक्षण को लेकर चर्चा चल रही है, जिस पर पक्ष और विपक्ष लगातार टिप्पणी कर रहें हैं| मध्यप्रदेश में ओबीसी को 27% आरक्षण मामले में सरकार अब घिरती नजर आ रही है| जिस सरकार के महाधिवक्ता ने अपने एफिडेविट में यह कहा था कि फिलहाल ओबीसी के अतिरिक्त 13% आरक्षण को होल्ड किया जाए| अब उसी सरकार के महाधिवक्ता ने एक अभिमत जारी किया है, जिसमें कोर्ट में चल रहे मामलों के अलावा ओबीसी के सभी विभागों में 27% के हिसाब से भर्ती करने के लिए अपनी राय दी है|
कमलनाथ ने किया ट्वीट
ओबीसी आरक्षण पर कमलनाथ ने ट्वीट कर कहा कि हमारी सरकार ने ओबीसी वर्ग के उत्थान के लिए प्रदेश में आरक्षण को 14% से बढ़ाकर 27% किया था|
इसको लेकर न्यायालय में कुछ याचिकाएं लगी थी, उन पर ही अंतरिम आदेश दिया गया था, बाक़ी जगह इस पर कोई रोक नहीं लगी थी|
लेकिन इस आदेश पर दिए एक गलत अभिमत के आधार पर अन्य सारे विभागों में नियुक्तियों में रोक लगाकर शिवराज सरकार में पिछड़े वरह को उनके हक़ से निरंतर वंचित किया था यहा था, निरंतर झूठ परोसा जा रहा था|
हम उसी का विरोध कर रहे थे?
अब सरकार ने लिए एक अभिमत के आधार यह मान लिया है कि प्रदेश में हमारी सरकार के आरक्षण को बढ़ाकर 27% किये जाने के निर्णय पर कोई रोक नहीं है| अंतरिम आदेश से संबंधित विभागों को छोड़कर सरकारी नौकरियों व शैक्षणिक संस्थानों में बढ़े हुए आरक्षण का लाभ दिया जा सकता है|
में शिवराज सरकार से मांग करता हूँ कि इस अभिमत के बाद गुमराह करने व झूठ बोलने कि राजनीती छोड़ तत्काल संशोधित आदेश जारी कर सरकारी नियुक्तियों व शैक्षणिक संस्थानों में बढ़े हुए आरक्षण का लाभ पिछड़े वर्ग को अविलंब दिया जाए|
हमारी सरकार के पिछड़े वर्ग के हित में लिए गए इस निर्णय को तत्काल लागू किया जाए और एवं न्यायालय में भी मजबूत पैरवी से लंबित याचिकाओं के मामले में भी पिछड़ा वर्ग का मजबूती से पक्ष रखा जाए|
हमारी सरकार ने ओबीसी वर्ग के उत्थान के लिये प्रदेश में आरक्षण को 14% से बढ़ाकर 27% किया था।
इसको लेकर न्यायालय में कुछ याचिकाएँ लगी थी, उन पर ही अंतरिम आदेश दिया गया था, बाक़ी जगह इस पर कोई रोक नही थी— Kamal Nath (@OfficeOfKNath) August 27, 2021




