सभी खबरें

भोपाल : भयावह मंजर, राख ठंडी होती नहीं की दूसरा शव पहुंच जाता, कम पड़ने लगी श्मशान घाटों में जगह

मध्यप्रदेश/भोपाल – कोरोना से मरने वालों के अंतिम संस्कार (funeral) के लिए भोपाल के विश्राम घाटों में अब जगह कम पडऩे लगी हैं। हर रोज विश्राम घाट की क्षमता से ज्यादा शव पहुंच रहे हैं। भदभदा और सुभाष विश्राम घाट में कोरोना से मरने वाले लोगों के अंतिम संस्कार के लिए स्थान नहीं मिल रहा। हालात बिगड़ रहे हैं। 

ख़बरों की मानें तो भदभदा विश्राम घाट में रोजाना कोरोना से मरने वाले 30 से ज्यादा शवों का अंतिम संस्कार किया जा रहा हैं। इसके अलावा सुभाष विश्राम घाट में भी इसी संख्या में अंतिम संस्कार किया जा रहा हैं। यदि छोला विश्राम घाट और शहर के कब्रिस्तान की संख्या को जोड़ लिया जाए तो यह आंकड़ा लगभग 100 तक पहुंच जाती हैं। 

विश्राम घाटों से जो खबर सामने आ रही है उसके अनुसार एक अंतिम संस्कार की राख भी ठंडी नही होती और दूसरा शव पहुंच जाता हैं। राख उठाने का मौका भी नहीं मिलता है, वहीं उसी जगह पर दूसरे शव का अंतिम संस्कार कर दिया जाता हैं। हिंदू रीति रिवाज के अनुसार अंतिम संस्कार के बाद अस्थियों को गंगा या फिर किसी दूसरी नदी में बहाने की परंपरा हैं। लेकिन शायद इस परंपरा को अब परिजन विश्राम घाट में मौजूदा व्यवस्था के कारण निभाने से वंचित रह रहे हैं। 

यही कारण है कि अब विश्राम घाट कमेटी नई जगह तैयार कर रही है, जिससे कि शवों के अंतिम संस्कार में किसी तरीके की कोई दिक्कत न हो। 

भदभदा विश्राम घाट कमेटी के अध्यक्ष अरुण चौधरी ने बताया कि अभी 10 से 12 शवों के अंतिम संस्कार के लिए जगह तैयार की गई थी, लेकिन अब विश्राम घाट परिसर में खाली पड़ी 2 एकड़ पर बुलडोजर चलाकर उसे अस्थाई रूप से विश्राम घाट में तब्दील किया जा रहा हैं। यहां पर 30 शवों के अंतिम संस्कार की व्यवस्था की जाएगी। दो-तीन दिन में इस विश्राम घाट में 50 शवों के अंतिम संस्कार की व्यवस्था हो सकेगी। वहीं सुभाष विश्राम घाट में खाली पड़े पार्क में अंतिम संस्कार की व्यवस्था की गई हैं। 

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published.

Back to top button