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अतिथि विद्वानों के भविष्य को सुरक्षित करने के बाद पीएससी के बारे में सोचे सरकार – अतिथि विद्वान

मध्यप्रदेश/भोपाल – प्रदेश के महाविद्यालयों को पिछले दो दशक से ज्यादा समय से अपने रक्त और परिश्रम से सींचने वाले महाविद्यालयीन अतिथि विद्वानों ने अपने भविष्य को सुरक्षित करने के लिए सूबे के मुखिया शिवराज सिंह चौहान से गुहार लगाई है।जैसा कि सर्वविदित है कि सत्ता की जड़ों को हिला देने वाला अतिथि विद्वानों का आंदोलन 140 दिन शाहजहानी पार्क भोपाल में चला था जिसमें विपक्ष के नेता के रूप में स्वयं मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान सहित वर्तमान कैबिनेट मंत्री डॉ नरोत्तम मिश्रा,गोपाल भार्गव,विश्वास सारंग सहित भारतीय जनता पार्टी के कई वरिष्ठ नेता आंदोलन में पधारे थे एवं अतिथि विद्वानों से यह वादा किए थे कि प्रदेश में बीजेपी की सरकार बनते ही अतिथि विद्वानों का नियमितीकरण हम पहली ही कैबिनेट में करेंगे।सरकार बनी,स्वयं शिवराज पुनः मुख्यमंत्री बने लेकिन अपने वादे से उलट वे आज तक नियमितीकरण की ओर एक सकारात्मक कदम नही बढ़ा सकें हैं।अतिथि विद्वान महासंघ के अध्यक्ष व मोर्चा के संयोजक डॉ देवराज सिंह ने कहा कि सरकार को तत्काल अतिथि विद्वानों के हित में निर्णय लेना चाहिए।पीएससी भर्ती इसका कोई हल नहीं है।माननीय मुख्यमंत्री जी नियमितीकरण का वादा किए थे।यदि मुख्यमंत्री जी वाकई में अतिथि विद्वानों के कल्याणार्थ गंभीर है तो कैबिनेट में प्रस्ताव लाकर अतिथि विद्वानों का नियमितीकरण करें।

 

 

शिवराज सिंह, वीडी शर्मा सहित पूरी कैबिनेट अतिथि विद्वानों के संघर्ष के साक्षी रहे है

महाविद्यालयीन अतिथि विद्वानों के पिछले 25 वर्षों के लंबे संघर्ष के साक्षी खुद मुख्यमंत्री तथा भाजपा प्रदेश अध्यक्ष रहें हैं।संघ के मीडिया प्रभारी डॉ आशीष पांडेय वा डॉ जेपीएस चौहान ने फ़िर याद दिलाया है की खुद शिवराज सिंह चौहान जी अतिथि विद्वानों के आंदोलन में आकर घोषणा किये थे कि पीएससी कोई विकल्प नहीं है।अतिथि विद्वानों के प्रतिनिधि मंडल को बुलाओ और नियमितीकरण का रास्ता निकालो।चूंकि अतिथि विद्वानों का चयन पूर्णतः पारदर्शी तरीके से राज्यस्तर की मेरिट के आधार पर होता है।अतः नियमितीकरण के रास्ते मे कोई बाधा भी नही है।यदि किसी चीज़ की आवश्यकता है तो वो है राजनैतिक इच्छाशक्ति की।इसलिए आग्रह है कि सरकार इस गंभीर मामले को तत्काल संज्ञान ले और नियमितीकरण हेतु सार्थक कदम उठाए।नियमितीकरण के मुद्दे पर उच्च शिक्षा विभाग के कई वरिष्ठ सेवानिवृत्त अधिकारी व विषय विशेषज्ञ अपने सुझाव भी दे चुके हैं और संघ भी मांग करता है कि इन बिंदुओं के तहत हमारी मागों को पूरा करें।

  • 1:-यूजीसी(नेट/सेट/पीएचडी)योग्यता धारी अतिथि विद्वानों का नियमितीकरण
  • 2:-पीजी एमफिल डिग्री धारी अतिथि विद्वानों को 3 या 4 साल का समय देते हुए योग्यता पूरी करने तक संविदा नियुक्ति दी जाए।

2017 की पीएससी अभी भी विवादों में घिरी है,पीएससी अतिथि विद्वानों के हित में नहीं

संघ के प्रवक्ता डॉ मंसूर अली ने कहा कि 2017 की सहायक प्राध्यापक भर्ती घोटाला प्रदेश के इतिहास का सबसे बड़ा घोटाला साबित हुआ है जिसमें दूसरे राज्यो के आधे से ज्यादा लोगों ने प्रदेश के अतिथि विद्वानों के हक में डाका डाला है।इस संबंध में विभिन्न मामले आज भी माननीय उच्चतम न्यायालय में विचाराधीन है।सरकार को सहानुभूति पूर्वक और अपने वादे के मुताबिक अनुभव योग्यता देखते हुए नियमितीकरण का रास्ता प्रशस्त करना चाहिए जिससे अतिथि विद्वानों के साथ न्याय हो सके।पूर्व में भी प्रदेश सरकार ने तदर्थ व आपाती भर्ती के नाम पर अस्थायी शिक्षकों को नियमित किया है।

एक वर्ष से कैबिनेट के मंजूरी के बाद भी 471 पदों में च्वाइस फीलिंग ना करवाना समझ से परे

आज भी लगभग 600 अतिथि विद्वान बेरोजगारी का दंश झेल रहे हैं जो विवादित पीएससी भर्ती के कारण फालेन आउट हुए थे।कानूनी लड़ाई लड़ने वाले डॉ पदम् सिंह वा शशांक शर्मा ने सरकार से आग्रह करते हुए कहा कि 471 पदों में वह तत्काल प्रक्रिया शुरू करें जिससे एक वर्ष से बेरोजगार अतिथि विद्वानों को रोजगार मिल सके वा अपना जीवन यापन कर सकें।

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