विंध्य प्रदेश बनाने की मांग : BJP विधायक नारायण त्रिपाठी को मिला एक और BJP MLA का समर्थन, बड़े आंदोलन का ऐलान

भोपाल से खाईद जौहर की रिपोर्ट – मैहर से भाजपा विधायक नारायण त्रिपाठी ने पार्टी लाइन से हटकर विंध्य प्रदेश बनाने की मांग को हवा दे दी। विंध्य को अलग राज्य बनाने की मांग अब प्रदेश में जोर पकड़ने लगी हैं। भाजपा विधायक नारायण त्रिपाठी के बाद अब एक और भाजपा विधायक ने अलग विंध्य प्रदेश बनाने की मांग का समर्थन कर दिया हैं।
विंध्य क्षेत्र के ही गुढ़ से विधायक नागेंद्र सिंह ने कहा है कि जिस तरह से विंध्य क्षेत्र की उपेक्षा हो रही है, उसे देखते हुए पृथक राज्य बनना चाहिए। नागेंद्र सिंह ने कहा कि नारायण त्रिपाठी की मांग उचित है, लेकिन उन्हें पहले पार्टी फोरम में यह बात रखनी चाहिए।
इतना ही नहीं भाजपा विधायक नारायण त्रिपाठी ने 27 जनवरी से विंध्य को अलग राज्य बनाने की मांग को लेकर बड़ा आंदोलन छेड़ने का ऐलान भी कर दिया हैं। यह आंदोलन विंध्य के चुरहट से शुरू किया जाएगा। विधायक नारायण त्रिपाठी ने कुछ दिनों पहले कहा था कि हम नया प्रदेश बनाने को नहीं बोल रहे हैं, हम चाहते हैं कि हमारा पुराना विंध्य प्रदेश ही वापस किया जाए।
बहरहाल, नारायण त्रिपाठी के बड़ा आंदोलन छेड़ने का ऐलान के बाद एक और भाजपा विधायक ने अलग विंध्य प्रदेश बनाने की मांग का समर्थन कर मध्यप्रदेश में सियासत की सियासत को गरमा दिया हैं। अब देखना दिलचस्प हो गया है कि आने वाले दिनों में इसको लेकर क्या देखने को मिल सकता हैं।
ऐसा था विंध्य प्रदेश
- आजादी के बाद सेंट्रल इंडिया एजेंसी ने पूर्वी भाग की रियासतों को मिलाकर 1948 में विंध्य प्रदेश बनाया था।
- विंध्य प्रदेश में 1952 में पहली बार विधानसभा का गठन भी हुआ था।
- 1 नवंबर 1956 को मध्यप्रदेश के गठन के साथ ही यह मध्यप्रदेश में मिल गया था।
- मध्यप्रदेश के गठन से पहले विंध्य अलग प्रदेश था।
- विंध्य प्रदेश की राजधानी रीवा थी।
- विंध्य प्रदेश के पहले मुख्यमंत्री पंडित शंभुनाथ शुक्ला थे, जो शहडोल के रहने वाले थे।
- विंध्य प्रदेश करीब चार साल तक अस्तित्व में रहा।
- विंध्य क्षेत्र पारंपरिक रूप से विंध्याचल पर्वत के आसपास का पठारी भाग माना जाता है।
- वर्तमान में जिस इमारत में रीवा नगर निगम है, वो विधानसभा हुआ करती थी।
कहां तक फैला है विंध्य क्षेत्र
मध्यप्रदेश के रीवा, सतना, सीधी, सिंगरौली, अनूपपुर, उमरिया और शहडोल जिले विंध्य क्षेत्र में ही आते हैं, जबकि कटनी जिले का कुछ हिस्सा भी इसी में माना जाता हैं।




