मध्यप्रदेश के किसानों की खाद से खिलवाड़ कर रहा कृषि विभाग,करोड़ो का घोटाला?

मध्यप्रदेश के किसानों की खाद से खिलवाड़ कर रहा कृषि विभाग
बिना जाँच औऱ सेम्पल रिजल्ट को परखें ही दे डाली किसानों को खाद, करोडों के घोटाले की आशंका

जबलपुर(सिहोरा): भारत देश कृषि प्रधान देश माना जाता हैं जहाँ प्रधानमंत्री मोदी किसानों को लिए बहुत सी योजना तो बना रहे लेकिन आज किसानों के साथ ही ठगी हो रही हैं ,
भारत सरकार किसानों के लिए योजना तो बना लेती हैं ,परन्तु आज किसान ठगा सा महसूस कर रहा हैं क्योंकि उसको असली खाद तक नहीं मिल पा रही हैं ऐसा ही मामला मध्यप्रदेश में मिला…
क्या हैं पूरा मामला??
दरअसल मामला मध्यप्रदेश का है जहाँ किसानों की खाद को लेकर कृषि विभाग ने कर लिया करोड़ों का घोटाला..
जिस प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज अपने को किसान पुत्र कहते हैं आज उन्हीं की सरकार में शिवराज के राज में भी मध्यप्रदेश के कृषि विभाग ने उन्हीं के किसानों को करोड़ों का चूना लगा दिया
5 मिनट में घुलने वाली खाद 5 दिन तक ना घुल पाई
जबलपुर जिले की मझौली तहसील के बैहर निवासी राम स्नेही राय ने अपनी शिकायत में बताया कि 16 जून को उसने सरकारी दुकान विपणन संघ डबल लॉक सिहोरा से 15 बोरी सुपर फास्ट खाद खरीदी थी जहां उन्होंने 15 जुलाई को अपने खेत में बारिश होने पर उसने उस खाद का खेत में प्रयोग किया लेकिन नतीजा देखकर वे दंग रह गया क्योंकि 5 मिनट में घुलने वाली खाद 5 दिन तक ना घुल पाई
जिसको लेकर किसान ने इसकी शिकायत कृषि विभाग के एसडीओ मनीषा पटेल से की जिसके बाद वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी जेएस राठौर को खाद का परीक्षण करने के निर्देश दिए गए
किसान को जो खाद मिली उसकी बोरी सागर के बंडा स्थित अन्नदाता सुपर(उर्वरक) कंपनी की बताई जा रही हैं

मध्यप्रदेश कृषि विभाग की अनदेखी औऱ लापरवाही का नतीजा भुगत रहे किसान
सरकारी नियमों का उल्लंघन करते हुए बिना सैम्पल की जाँच औऱ रिजल्ट के नतीजे कृषि विभाग ने बांट दी किसानों को खाद जिसमें कृषि विभाग की लापरवाही साफ तौर से देखी जा रही है क्योंकि नियम ये कहते हैं कि जाँच हर पैमाने औऱ हर जगहों पर सैम्पल की जाँच लिए जाते हैं औऱ उसकी जाँच की रिपोर्ट के आधार पर ही किसानों तक खाद मुहैया कराई जाती हैं लेकिन कृषि विभाग के आला अधिकारियों की मिलीभगत से फर्जी कंपनियों की फ़र्ज़ी खाद भी किसानों को बेच दी गई हैं क्योंकि ये सभी सरकारी सोसायटी में जाकर किसानों को बेचीं जाती हैं
बड़ा सवाल ??
किसानों को फ़र्ज़ी खाद तो बाट दी गई हैं जिसका पैसा सरकार ने उनसे नगद में ले लिया हैं लेकिन अब क्या किसानों का पैसा उन्हें लौटाया जाएगा या असली खाद ,क्योंकि अब समय के साथ किसान भी अब किसानी में लग गए हैं वे एकदम व्यस्त हैं ,फ़िलहाल वे रोपा लगाने में लगे हुए औऱ उनको उम्मीद थी कि जो सरकार हमें दे रही हैं वह असली खाद हैं लेकिन कृषि विभाग की मेहरबानी से अपने आप को ठगा महसूस कर रहें हैं
किसान समय -समय पर होते हैं परेशान क़भी यूरिया की कमी,तो क़भी फ़र्ज़ी खाद ,तो क़भी बिजली लेकिन शासन-प्रशासन ने अपनी आंखें मूंद ली हैं, किसानों के साथ लगातार अनदेखी हो रही है
क्या कहता है भारतीय किसान यूनियन ??
कुछ कृषको ने मध्यप्रदेश राज्य विपणन संघ डबल लॉक सिहोरा से विकृत खाद बैहर कला ग्राम के कृषक रामसनेही राय ने अपने धान के रोपा लगाते समय डाली गई सिंगल सुपर फासफेट खाद बिना घुले आज भी ज्यो के त्यों पड़ी है परेशान किसान ने भारतीय किसान यूनियन के कार्यालय मे संपर्क कर जानकारी दी जिसे लेकर SDO क़ृषि एवं संभंधित अधिकारीयों ने भौतिक जांच के पश्चात कृषक के गॉव जाकर खेत गए इसके पश्चात उसके घर मे रखा हुआ शेष स्टॉक भी चेक किया उसके उपरान्त खाद का सैंपल लेकर पुनः परिक्षण हेतु क़ृषि विभाग द्वारा भेजा जाएगा परन्तु महत्वपूर्ण बात ये है की खाद के विक्रय करने के पूर्व शासन द्वारा सैंपल का परिक्षण रिपोर्ट आने के उपरान्त ही मापदंडो के अनुरूप होने पर ही विक्रय की अनुमति दी जाती है लेकिन क़ृषि विभाग द्वारा सैंपल तो लिए गया है लेकिन उसके परिक्षण की रासायनिक रिपोर्ट प्राप्त नहीं है ऐसी स्तिथि मे शासन ने कैसे विक्रय करने की अनुमति दी विचारणीय प्रश्न किसान अपने आप को ठगा महसूस कर रहा है
रमेश पटेल (जिलाध्यक्ष) भारतीय किसान यूनियन
जबलपुर (मध्यप्रदेश )
क्या कहते हैं जिम्मेदार??
डबल लॉक में रखी खाद की सैंपलिंग करवा दी गई है। साथ ही उसके स्टॉक को प्रतिबंधित कर दिया गया है। सैंपलिंग की रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
एसके निगम, डिप्टी डायरेक्टर एग्रीकल्चर जबलपुर
पिछले महीने जब यह स्टॉक आया था तब भी हमने इसके सैम्पल की जाँच की थी लेकिन जाँच की रिपोर्ट के नतीजे नहीं आये है फ़िर दोबारा हमने जांच करकें इसकी बिक्री पर रोक लगा दी है
(मनीषा पटेल ,SDO मझौली-सिहोरा)
अमानक खाद के बारे में मामला संज्ञान में आया हैं, मामले को लेकर कृषि विभाग इसकी जाँच कर रहा हैं , DDO साहब से मेरी बात हुई हैं पूर्व में भी इसका सैंपल लिया गया था जिसकी रिपोर्ट मंगवाई जा रही है ,जो भी इसमें दोषी पाया जाता है चाहे वो कंपनी हो या कृषि अधिकारी, इस पर कारवाई होगी
(सी पी गोहिल ,SDM सिहोरा )
अपने आप को बचाने में लगे अधिकारी ,जिम्मेदारी से बच रहे अधिकारी
जब द लोकनीति ने इस मामले को लेकर ग्राउंड रिपोर्ट की तो पता चला कि SDO मैडम ने इसकी सैंपल जाँच तो कई बार भेजीं लेकिन सैंपल की रिपोर्ट एक भी नहीं मिली ,वही दूसरी ओर जब इस मामले को लेकर हमारे भोपाल ऑफिस ने जबलपुर एग्रीकल्चर के डिप्टी डायरेक्टर एसके निगम से बात की तो पहले तो उनका कहना था कि किसान के खेत में नमी नहीं हैं और हमारी खाद बिल्कुल सही है,जिस बैच का यह मामला उसकी जाँच तो पहले हो चुकी है ,जब हमारे पत्रकार द्वारा क्रॉस किया गया की SDO मैडम ने तो बोला है की हमने इसके सैंपल जाँच बार -बार भेजी है लेकिन रिपोर्ट हमारे पास एक भी नहीं है तो DDO साहब आग बबूला होकर कहने लगे “अरे उसको क्या मालूम ” बैच की जाँच तो हो चुकी हैं ,तो कुल मिलाकर हमने अपनी पड़ताल में पाया कि अधिकारी इस मामले को लेकर अपनी ज़िम्मेदारी से बच रहे है और इसकी यदि ढंग से जाँच की जाए तो करोड़ो का घोटाला सामने आयेगा हालाँकि कृषि विभाग की मिलीभगत औऱ घोर लापरवाही से ,ख़ून पसीने बहाने वाला ग़रीब किसानो के साथ अन्याय औऱ उन्हें जमकर फ़र्जी खाद देकर लूटा तो गया है
अब देखना यह होगा की सरकार किसानों को लेकर कितनी जागरूक और किसान हितेषी हैं

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