मोदी के मंत्री के बिगड़े बोल कहा "देश में नौकरियां ही नौकरियां,लेकिन उत्तर भारतीयों में योग्यता की हैं कमी "-संतोष गंगवार (रोज़गार राज्य मंत्री) ,क्या मोदी सरकार के हिसाब से देश में बेरोज़गारी समस्या ही नहीं?

मोदी के मंत्री के बिगड़े बोल कहा "देश में नौकरियां ही नौकरियां,लेकिन उत्तर भारतीयों में योग्यता की हैं कमी "-संतोष गंगवार (रोज़गार राज्य मंत्री) ,क्या मोदी सरकार के हिसाब से देश में बेरोज़गारी समस्या ही नहीं?

 देश में रोज़गार की कमी नहीं बल्कि उत्तर भारत के लोगों में योग्यता की कमी हैं -संतोष गंगवार (रोज़गार राज्य मंत्री) ,सरकार के हिसाब से बेरोज़गारी की समस्या ही नहीं 

आपको नहीं लगता कि आजकल हमारी सरकार अपनी नाक़ामयाबी अपना दोष दूसरों पर डालने का काम कर रही हैं ?

मुख्य बातें 
हाल ही में कुछ दिन पूर्व भारत की वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने ऑटो सेक्टर में मंदी का कारण कुछ अलग ही समझाया 
उन्होंने बताया की इसके जिम्मेदार ओला(OLA) और उबेर(UBER) जैसी कंपनी हैं ,और मिलेनियल (Millennials) जैसे शब्द का प्रयोग किया 
 देश में रोज़गार की कमी नहीं  बल्कि उत्तर भारत के लोगों में योग्यता की कमी हैं -संतोष गंगवार (रोज़गार राज्य मंत्री)
बेरोज़गारी के आंकड़े सामने आने के बाद भी यह सरकार मानने को बिलकुल तैयार नहीं है कि देश में नौकरियाँ जा रही हैं।

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भारत के रोज़गार राज्य मंत्री संतोष गंगवार का कहना हैंकि  -देश में रोज़गार की कमी नहीं ,बल्कि उत्तर भारत के लोगों में योग्यता(qualification) की कमी हैं  
 उत्तर भारत के लोगों में सच में योग्यता की कमी होती है, हर कोई कहेगा नहीं, ऐसा बिल्कुल नहीं है। दुनिया भर में उत्तर भारत के लोगों ने अपने हुनर के दम पर नाम कमाया है। यह बयान कोई आम शख़्स दे तो समझा जा सकता है ,कि उसकी समझ रोज़गार या उत्तर भारतीयों को लेकर कम ही रही होगी। लेकिन जब मोदी सरकार में मंत्री और बीजेपी के वरिष्ठ नेता ऐसा बयान दें तो उत्तर भारतीयों का नाराज होना स्वाभाविक है। केंद्र सरकार में मंत्री संतोष गंगवार ने कहा है कि देश में नौकरियों की कोई कमी नहीं है बल्कि उत्तर भारत के लोगों में योग्यता की कमी है। 
केंद्र सरकार में श्रम और रोज़गार राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) संतोष गंगवार ने शनिवार को एक प्रेस कॉन्फ़्रेंस में कहा, ‘मैं यह कहना चाहता हूँ कि देश में नौकरियों का कोई अकाल नहीं है, बहुत रोज़गार है। मैं इसी मंत्रालय को संभाल रहा हूँ और हर दिन के हालात पर नज़र रखता हूँ। हमारे पास रोज़गार देने के लिए रोज़गार दफ़्तर हैं और हमने इसके लिए अलग से भी व्यवस्था की है। हमारा मंत्रालय हालात पर नज़र रख रहा है।’ 

गंगवार ने आगे कहा, ‘जो लोग हमारे उत्तर भारत में नौकरियां देने के लिए आते हैं, वे इस बात का सवाल कर देते हैं कि जिस पद के लिए वे रख रहे हैं उसकी क्वालिटी का व्यक्ति हमें कम मिलता है।’ 

दूसरी तरफ़  वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitaraman) ने ऑटोमोबाइल सेक्टर (Auto Sector) में आई ज़बरदस्त मंदी को लेकर बयान दिया कि 'मिलेनियल्स' की सोच बदली है और वो ओला और उबर (Ola & Uber) जैसी प्राइवेट टैक्सी के इस्तेमाल पर ज़्यादा भरोसा कर रहे हैं इसलिए वाहन खरीदी कम होती जा रही है. सीतारमण के इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर ये हैशटैग ट्रेंड (Trending Hashtag) करने लगा और लोग देश की तमाम स्थितियों के लिए इन्हीं 'मिलेनियल्स' के माइंडसेट को ज़िम्मेदार ठहराकर मज़ाकिया पोस्ट करने लगे हैं

जब देश भर में अर्थव्यवस्था के मोर्चे पर ख़राब ख़बरें आ रही हैं। ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री से साढ़े तीन लाख नौकरियाँ जा चुकी हैं, इसके अलावा हीरा उद्योग से भी नौकरियाँ जाने की ख़बर है। देश की आर्थिक विकास दर गिरकर 5 फ़ीसदी पर पहुँच गई है और सबसे चिंताजनक बात यह है कि बेरोज़गारी की दर पिछले 45 साल में सबसे ज़्यादा हो गई है।

ऐसे में मंत्री का यह बयान बेहद निराशाजनक है क्योंकि सरकार को चाहिए कि वह ख़राब आर्थिक हालात के बीच ऐसे लोग जिनकी नौकरियाँ चली गई हैं, उनके लिए नौकरियों का इंतजाम करे बजाय इसके कि वह देश के बड़े हिस्से के लोगों के लिए कह दे कि उनमें योग्यता की कमी है। 

इन सब के बीच आप किसी युवा से प्रश्न करेंगे तो उसके हाँथ रोजग़ार के नाम पर सिर्फ़ निराशा हैं ,अब शायद भीड़तंत्र वाला युवा भी धीऱे -धीऱे समझ रहा हैं कि रोज़गार के नाम पर हम से वोट तो लिया गया हैं ,लेकिन हमारे साथ धोख़ा हुआ हैं